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नेशनल मेडिकल कमीशन बिल लोकसभा से पास, अब निजी कॉलेज में भी 50 फीसदी सीटें गरीब छत्रों के लिए होगा

डेस्क: लोकसभा में सोमवार को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक 2019 पास हो गया। इस विधेयक के तहत मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को समाप्त कर, उसके स्थान पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (नेशनल मेडिकल कमीशन) का गठन किया जाएगा। लोकसभा में संपूर्ण विपक्ष मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI ) का स्थान लेने वाले राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक, 2019 को गरीब-विरोधी और सामाजिक न्याय और सहकारी संघवाद के खिलाफ करार देते हुए इसे वापस लेने की मांग कर रहा था।

वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री हर्षवर्धन ने विधेयक को गरीबों के हित में बताते हुए कहा कि इससे न सिर्फ सरकारी बल्कि निजी कॉलेज में 50 फीसदी सीटें गरीब तबके के मेरिटधारी छात्रों की पहुंच में होंगी। उन्होंने कहा कि जब इतिहास लिखा जाएगा, तब यह विधेयक सबसे बड़े सुधार के रूप में दर्ज होगा। विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस, द्रमुक और तृणमूल कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने इसे अलोकतांत्रिक और संघीय ढांचे के खिलाफ बताया। इसपर केंद्रीय स्वास्थ्य ने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि एनएमसी विधेयक संघीय स्वरूप के खिलाफ है। राज्यों को संशोधन करने का अधिकार होगा, वे एमओयू कर सकते हैं ।

गौरतलब है कि इस कानून के आते ही पूरे भारत के मेडिकल संस्थानों में दाखिले के लिए सिर्फ एक परीक्षा ली जाएगी। इस परीक्षा का नाम NEET (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेस टेस्ट) रखा गया है। भारत में अबतक मेडिकल शिक्षा, मेडिकल संस्थानों और डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन से संबंधित काम मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया (MCI) की ज़िम्मेदारी थी। बिल के पास होने के बाद अब MBBS पास करने के बाद प्रैक्टिस के लिए एग्जिट टेस्ट देना होगा। अभी एग्जिट टेस्ट सिर्फ विदेश से मेडिकल पढ़कर आने वाले छात्र देते हैं।

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