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मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धि: तीन तलाक बिल राज्यसभा में भी हुआ पास, मुस्लिम समाज बेटियों को मिलेगा न्याय

राज्यसभा में मंगलवार को तीन तलाक को अपराध बनाने वाले बिल को चर्चा और पास कराने के लिए लाया गया। जहां बिल बहुमत से पास हो गया है। बिल के पक्ष में 99 और विपक्ष में 84 वोट पड़े हैं। इस बिल में तीन तलाक को गैर कानूनी बनाते हुए 3 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान शामिल है। लोकसभा से बीती 26 जुलाई को यह बिल पास हो गया था।

कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि जिस उद्देश्य से यह बिल लेकर आया गया है हम उसके खिलाफ है। यह समस्या उतनी बड़ी नहीं थी, मुस्लिमों के सभी तबके इसको मानते भी नहीं है। कोर्ट के आदेश के बाद इसे अवैध करार दिया गया था और मौजूदा कानून में इसे रोकने के पर्याप्त प्रवाधान थे। उन्होंने कहा कि इस कानून पर क्या अल्पसंख्यक समुदाय से चर्चा की गई थी, क्योंकि मोदीजी तो सबके विश्वास की बात भी अब करने लगे हैं। गुजरात दंगों में जिन लोगों को हत्या कर दी गई उनके परिजनों के बारे में क्या कभी सरकार ने सोचा है। इसे अपराध बनान ठीक नहीं है, हिन्दुओं में भी ऐसी प्रथाएं हैं क्या उसके खिलाफ भी सरकार बिल लेकर आएगी। करीब 20 लाख हिन्दू महिलाओं को भी छोड़ दिया गया है क्या मंत्रीजी उस पर भी कानून लाएंगे।

वहीं चर्चा का जबाव देते हुए केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कानून के बिना पुलिस पीड़ित महिलाओं के शिकायत सुनने के लिए तैयार नहीं थी। मुस्लिम समाज बेटियों के लिए न्याय पर ही सवाल क्यों उठते हैं, यही सवाल 1986 में उठे थे और आज भी उठे हैं। कांग्रेस भले ही 44 हो गई, भले ही आज 52 हो गई। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने देश हित में बगैर डरे फैसले लिए और चुनाव में हार-जीत के बारे में कभी नहीं सोचा। प्रसाद ने कहा कि हम आतंकवाद से लड़ने वाले लोग हैं। मंत्री ने कहा कि अगर इस्लामिक देश भी महिलाओं के लिए बदलाव की कोशिश कर रहे हैं तो लोकतांत्रिक देश होने के नाते हमें क्यों नहीं करना चाहिए। प्रसाद ने कहा कि गरीब परिवारों से ही तीन तलाक की 75 फीसदी महिलाएं आती हैं और हमें उनके बारे में विशेष तौर पर सोचना चाहिए।

Desk
Social Activist
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