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अवार्ड मिलने की खुशी में रवीश के समर्थक अचानक से मोदी के अंधभक्त सा ‘बिहेवने’ लगे हैं !

डेस्क: अच्छी बात है, किसी को अवार्ड मिला है। हमने बधाई भी दी। मगर ये क्या की लोग अब इस खुशी में विपक्षी पक्ष की हूटिंग करने लगे। रवीश के समर्थक अचानक से मोदी के अंधभक्त सा बिहेवने लगे।

ऐसे लोगों को यह ध्यान रखना चाहिए कि भैया आपलोग भी मानते हो कि रविश की पत्रकारिता का स्वर्णिम काल आज से 5-7 साल पहले था। अब रविश पत्रकारिता नहीं बल्कि एक विशेष प्रजाति के सेकुलरवाद को लीड कर रहे हैं। वो वाद जो कम्युनिस्ट और पाक परस्त है और जो कांग्रेस नहीं, राहुल परस्त है। अब के रविश मात्र सेलेक्टिव और नेगेटिविटी की पत्रकारिता कर रहे।

ऐसे में जबकि रेमन साहब – जिनके नाम पर यह पुरस्कार है – ने अपने कार्यकाल में कम्युनिस्ट विचारधारा का दमन किया था, रविश को अपनी तात्कालीक नैतिकता के हिसाब से यह पुरस्कार लेना ही नहीं चाहिए। गर ले भी रहे तो कम से कम अपने भक्तों को खुद को भगवान घोषित करने से मना करना चाहिए।

रही बात मैग्सेसे पुरस्कार की तो यह अमरीकी लोग हमेशा से धारा के विपरीत विचारधारा या यूं कहिये की नकारात्मक धारा वाले को देता आया है। सोचिये की क्या ये लोग किरण बेदी को अब भी पुरस्कार के योग्य मानेंगे ?

बाद बांकी न तो पुरस्कार देने वाले यह देखने आ रहे कि केजरीवाल आज क्या है और न कभी यह देखने आएंगे की रविश जिसके लिये काम कर रहे NDTV का वो मालिक कितना बड़ा टैक्स चोर है।

आलेख प्रवीण झा फेसबुक टाइमलाइन से 

डिस्क्लेमरइस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं।  इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। 

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