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रवीश कुमार नदी की धारा के विपरित नाव चलाने का हिम्मत रखते हैं, इसलिए गालियां सुनते हैं !

सुबह की दिनचर्या में मोबाइल का दर्शन करना भी अनिवार्य अंग बन चुका है। तो आज सुबह-सुबह Ravish Kumar सर को मैग्सेसे अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा ये खबर मिली। पूरा का पूरा टाइमलाइन बधाई संदेशों से भरा हुआ था लेकिन उसके बाद शुरू हुआ विरोध का सिलसिला। मोर्चा संभाला मीडिया जगत के कुछ महारथियों ने और कुछ अन्य पेशों से जुड़े धुरंधरों ने जिन्हें रवीश कुमार फूटी आंख नहीं सुहाते हैं। अब इसकी क्या वजह है ये सबको मालूम है तो उसपर चर्चा करना बेकार ही है।

हां तो, रवीश कुमार के घोर निंदकों के मुताबिक वे ‘निष्पक्ष पत्रकारिता’ नहीं करते हैं, चलिए मान लेता हूं आपकी बात…अब मुझे आज की तारीख में किसी एक निष्पक्ष पत्रकार का नाम बता दीजिए। मुझे लगता है रवीश कुमार के गले में खराबी है और शायद डॉक्टरों ने उनको सुझाव दिया है की आप चिल्लाया मत करिए।

आज अगर स्टूडियो के अंदर रवीश कुमार भी दहाड़ मारकर जोर-जोर से चिल्ला-चिल्लाकर, अपनी भुजाएं फड़काकर, क्रोध में अपनी आंखों को लाल कर या दूसरे शब्दों में गदर फिल्म के सन्नी देवल की तरह एंकरिंग कर पाते तो शायद वे निष्पक्ष पत्रकार हो पाते।

अब बताइये, भला किसी नेशनल न्यूज चैनल के प्राइम टाइम पर गली-कस्बे की बात, किसानों की समस्या, बेरोजगारी, शिक्षा की बदहाली जैसे नीरस मुद्दों को उठाना चाहिए ?

ये भी कोई मुद्दा है, ये रवीश कुमार पगलाए गए हैं जो स्वतंत्रता सेनानी के लेट लतीफ से चलने और दरभंगा के ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी जैसे मुद्दों पर प्राइम टाइम में बकैती किया करते हैं। और सबसे बड़ा पाप तो इनका ये है कि ‘सरकार’ और ‘सत्ता’ का विरोध कर देते हैं।

नदी की धारा के विपरित नाव चलाने का दुस्साहस करते हैं तब तो गालियां सुनेंगे ही ये अलग बात है कि यही काम वे पहले भी किया करते थे तब आज की तारीख में जो इनको गाली दे रहे हैं वे पहले इनको निष्पक्ष माना करते थे। अब कुछ विद्वानों का पोस्ट तो ये भी देखने को मिला की वे मैग्सेसे अवॉर्ड के पैनलिस्टों पर ही पक्षपात करने का आरोप लगा दे रहे हैं।

वैसे, मैं ये मानता हूं कि ऐसा भी नहीं है कि रवीश कुमार शत प्रतिशत सही हैं और एक पत्रकार के रूप में उनकी छवि सिर्फ मोदी विरोधी हो जाना भी उचित नहीं है लेकिन आप उनकी पत्रकारिता पर सवालिया निशान नहीं लगा सकते हैं। रवीश कुमार पर वे पत्रकार भी सवाल उठा रहे हैं जो राखी सावंत और मलाइका के डांस के झटकों पर नींद में भी शो बना देने की कूबत रखते थे। जब न्यूज चैनलों पर स्वर्ग की सीढ़ी, सांप-संपेरा, निर्मल बाबा के समोसे की हरी चटनी का चमत्कार, लाफ्टर शो, सास बहू जैसे हाई टीआरपी प्रोग्राम चलते थे तब उस दौर में ‘रवीश की रिपोर्ट’ ने आम लोगों के बीच में खबरिया चैनलों पर भी खबरें चलती है का भरोसा जगाया था। बधाई रवीश सर…हार्दिक बधाई

आलेख युवा जर्नलिस्ट Pankaj Prasoon जी के फेसबुक टाइमलाइन से 

डिस्क्लेमरइस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। 

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