बिहार राज्य

दरभंगा: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय ने धूमधाम से मनाया 47 वां स्थापना दिवस

दरभंगा: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय ने मनाया धूमधाम से 47 वां स्थापना दिवस समारोह। दिनांक 3 अगस्त से 5 अगस्त तक विश्वविद्यालय द्वारा स्थापना दिवस समारोह धूमधाम से मनाया जा रहा है । विगत दो दिनों से वृक्षारोपण , खेल प्रतियोगिता आदि का आयोजन किया गया । सोमवार तीसरे दिन सुबह प्रभात फेरी निकाली गई। विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार कुलपति प्रोफेसर एस के सिंह के निर्देश पर स्थापना दिवस समारोह को धूमधाम से मनाने का निर्णय लिया गया और इसी क्रम में आज लगभग एक दर्जन महाविद्यालयों , विभागों की ओर से 3:00 अपराह्न विभिन्न समसामयिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर आधारित आकर्षक झांकियां प्रस्तुत की गई । झांकी चौरंगी से विश्वविद्यालय मुख्यालय के सामने राजपथ से मोतीमहल होते हुए जुबली हॉल के सामने कुलपति प्रतिकुलपति , अन्य पदाधिकारियों अतिथियों एवं निर्नायक मंडल के समक्ष अपना प्रदर्शन किया ।

स्थानीय सी एम कॉलेज दरभंगा ने जहां छठ पूजा पर झांकी निकाली वहीं सीएम साइंस कॉलेज ने मिथिला की संस्कृति पर अपनी झांकी प्रस्तुत की। सीएम लॉ कॉलेज में पर्यावरण संरक्षण पर तो के एस कॉलेज लहेरियासराय की झांकी बाबू कुंवर सिंह पर केन्द्रित रही। मारवाड़ी महाविद्यालय की टीम ने स्वस्थ् एवं स्वच्छ भारत पर तो मिल्लत कॉलेज लहेरियासराय ने पर्यावरण पर तथा एम के कॉलेज ने नारी सशक्तिकरण पर अपनी अपनी झांकियां प्रस्तुत की। एम एल एस एम कॉलेज ने राष्ट्रीयता पर और एम आर एम कॉलेज ने नारी शक्ति पर झांकी प्रस्तुत की। दूरस्थ शिक्षा निदेशालय की ओर से मिश्रित झांकी प्रस्तुत की गई जिसमें ग्रामीण परिवेश , समृद्ध भारत ,बौद्ध शिक्षा पर झांकी प्रस्तुत की गई। संगीत एवं नाट्य विभाग ने शिव भक्ति एवं कांवरियों की झांकी प्रस्तुत की। छात्रसंघ ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय ने मिथिला की संस्कृति पर झांकी प्रस्तुत किया। सभी झांकियों को लोगों ने खूब सराहा एवं प्रशंसा की। तीन उत्कृष्ट झांकियों को प्रथम द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। कुलपति प्रोफेसर सुरेंद्र कुमार सिंह ने सभी विभागों , महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं , एन एस एस के स्वयंसेवकों जिन्होंने झांकी प्रस्तुत की है उन्हें बधाई दी है और कहा है कि ये झांकियां यह दर्शाती है कि मिथिला एवं मिथिला विश्वविद्यालय की गौरवशाली इतिहास रहा है ।

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