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अनुच्छेद 370 पर कांग्रेस में ‘दो फाड़’: पार्टी के युवा नेताओं ने मोदी सरकार का किया खुलकर समर्थन

डेस्क: जम्मू-कश्मीर पर केंद्र सरकार ने बड़ी घोषणा कर दी है। राष्‍ट्रपति राम नाथ कोविंद के आदेश के बाद भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने राज्‍यसभा में इसकी घोषणा की। गृह मंत्री ने सोमवार को सदन में कहा कि जम्‍मू-कश्‍मीर से अनुच्‍छेद 370 के खंड एक को छोड़कर सभी प्रावधानों को खत्‍म किया जा रहा है। इसके अलावा राज्य के पुनर्गठन का प्रस्ताव भी पेश किया गया। ये बिल राज्यसभा से पास हो गया है। बिल के पक्ष में 125 वोट पड़े जबकि 61 वोट विपक्ष में पड़े।अब जम्मू-कश्मीर दो भागो में बंट जाएगा।

राजयसभा में सरकार के इस फैसले का कांग्रेस ने जोरदार विरोध किया है। कांग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद ने अनुच्छेद 370 को खत्म करने और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि सरकार देश के टुकड़े-टुकड़े करना चाहती है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग केंद्र सरकार के साथ नहीं हैं।

वहीं कांग्रेस के कई युवा नेता मोदी सरकार के इस फैसले का समर्थन कर रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने फैसले का समर्थन करते हुए अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा है, ‘मेरा पहले से ये विचार रहा है कि 21वी सदी मे अनुच्छेद 370 का औचित्य नही है और इसको हटना चाहिये।ऐसा देश की अखण्डता व जम्मू-कश्मीर की जनता जो हमारे देश का अभिन्न अंग है के हित मे भी है। मगर पूर्णत: मौजूदा सरकार की ज़िम्मेदारी है की इस का क्रियान्वरण शांति व विश्वास के वातावरण मे हो’

वहीं महारष्ट्र कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा ने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अनुच्छेद 370 को उदार बनाम रुढ़िवादी बहस में बदल दिया गया। पार्टियों को अपनी विचारधारा को अलग रखकर इस पर बहस करनी चाहिए कि भारत की संप्रभुता और संघवाद, जम्मू-कश्मीर में शांति, कश्मीरी युवाओं को नौकरी और कश्मीरी पंडितों के न्याय के लिए बेहतर क्या है?”

इसके आलावा कांग्रेस की रायबरेली सदर से MLA अदिति सिंह ने भी आर्टिकल 370 हटाए जाने का समर्थन किया है। बता दें वे पांच बार कांग्रेस विधायक रहे अखिलेश सिंह की बेटी हैं।

कांग्रेस नेता जनार्दन द्विवेदी ने भी इसका समर्थन किया है। जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि इतिहास में की गई एक बड़ी गलती आज सुधार ली गई है। जनार्दन द्विवेदी ने कहा, “राजनीति में मेरे गुरु रहे राम मनोहर लोहिया जी हमेशा से ही अनुच्छे 370 के खिलाफ थे। इतिहास में की गई एक बड़ी गलती आज सुधार ली गई है।”

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