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कांग्रेस को अब भी शर्म नहीं है, जबकि उनके तुष्टीकरण से बंटा था देश !

डेस्क: दिल्ली में श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन की तरफ से आयोजित ‘तीन तलाक का खात्मा: ऐतिहासिक गलती का सुधार’ कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। इस दौरान उन्होंने कहा कि तीन तलाक के विरोध के पीछे तुष्टीकरण की राजनीति है।

उन्होंने कहा कि 60 के दशक में तुष्टीकरण वोटबैंक राजनीति का हथियार बना और कुछ पार्टियों की यह आदत बन गई। शाह ने कहा, ‘तीन तलाक की कुप्रथा को हटाने पर इतना विरोध क्यों है? इसके पीछे तुष्टीकरण का भाव और तुष्टीकरण की राजनीति जिम्मेदार है। आजादी से पहले ही भारत को टूटने से बचाने के लिए तुष्टीकरण की शुरुआत हुई और वह तुष्टीकरण ही भारत के टूटने का कारण बनी। आजादी के बाद 60 के दशक में तुष्टीकरण ही वोटबैंक की राजनीति का जरिया बना। इसकी आदत कुछ पार्टियों को बन गई और इसी कारण से ऐसी कुप्रथाएं चलती थीं।’

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अमित शाह ने कहा, दुहाई दी जाती है कि तीन तलाक मुस्लिम शरीयत का अंग है, हमारे धर्म के रीति-रिवाजों में दखल न दिया जाए। जबकि बांग्लादेश, अफगानिस्तान, मोरक्को, इंडोनेशिया, श्रीलंका, जॉर्डन समेत 19 देश ऐसे हैं जिन्होंने 1922-1963 तक तीन तलाक खत्म कर दिया। अगर यह इस्लाम के खिलाफ होता तो ये देश गैर इस्लामिक काम क्यों करते।

गृह मंत्री ने कहा कि कांग्रेस को अब भी शर्म नहीं है और वह तीन तलाक के समर्थन में है। उन्होंने कहा, ‘आज भी कांग्रेस को कोई शर्मा नहीं है। वे कहते हैं कि वे तीन तलाक के पक्ष में है, इसे बना रहना चाहिए। क्यों? उनके पास इसका कोई जवाब नहीं है।

शाह ने कहा कि सबके विकास के लिए तुष्टीकरण की नहीं बल्कि संवेदना की जरूरत होती है। उन्होंने कहा, ‘विकास की दौड़ में पीछे रह गए लोगों को ऊपर उठाने के लिए संवेदना की जरूरत है, तुष्टीकरण की जरूरत नहीं है। गरीब गरीब होता, चाहे वह हिंदू हो, मुसलमान हो, ईसाई हो, पारसी हो या जैन हो।’

गौरतलब है मोदी सरकार ने संसद में तीन तलाक को खत्म करने वाला बिल पारित कराया है। तीन तलाक बिल राज्यसभा में पारित होने के बाद पीएम मोदी ने कहा था कि उनका यह कदम भारत के इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा।

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