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आ गया अच्छे दिन ! ऑटोमोबाइल के बाद 10 करोड़ लोगों को रोजगार देने वाले टेक्सटाइल्स सेक्टर में हाहाकार, जा सकती हैं हजारों नौकरियां

डेस्क: अभी पूरा देश राष्ट्रवाद के घोड़े पर सवार जम्मू-कश्मीर को लेकर सरकार के फैसले के गुणगान में व्यस्त है। दूसरी तरफ देश भयंकर आर्थिक मंदी की ओर अग्रसर होती दिख रही है। ऑटो सेक्टर में मंदी और बिक्री में कमी के बाद अब टेक्सटाइल सेक्टर में भी मंदी का असर दिख रहा है। आर्थिक मंदी के चलते इस सेक्टर में भी हाहाकार मच गया है।

इस सेक्टर में भी नौकरियां जा सकती हैं। व्यापार ठप पड़ रहा है। सस्ता माल इम्पोर्ट करवाया जा रहा है। कच्चे माल की कीमत बढ़ गयी है। और एक्सपोर्ट ड्यूटी और टैक्स इतने हैं कि भारतीय उत्पाद विदेशों में बिक भी नहीं रहा है।

अखबारों में विज्ञापन देकर टेक्सटाइल्स मिल्स एसोसिएशन ने अपनी आप बीती बताई है। इंडियन एक्प्रेस अखबार में छपे विज्ञापन में नॉर्दन इंडिया टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन द्वारा बताया गया है कि टेक्सटाइल सेक्टर में भी मंदी के संकेत हैं और यहां भी नौकरियों पर संकट मंडरा रहे हैं।

 

दिए गए विज्ञापन में साल 2018 और 2019 की तुलना कर बताया गया है कि इस अवधि के अप्रैल से जून तक के महीने में सूती धागे के निर्यात में कमी आई है। साल 2018 के अप्रैल महीने में सूती धागे का निर्यात 337 यूएस मिलियन डॉलर का था जबकि 2019 में 266 यूएस मिलियन का ही रहा। मई 2018 में सूती धागे का निर्यात 349 यूएम मिलियन डॉलर का था।

वहीं,2019 के इसी अवधि में यह 241 यूएस मिलियन डॉलर का ही रहा है। जून 2019 में हालात और खराब नजर आ रहे हैं। इस अवधि में 188 यूएस मिलियन डॉलर का ही सूती धागा ही निर्यात किया गया। जबकि साल 2018 में सूती धागे का निर्यात 378 यूएस मिलियन का रहा था।

नॉर्दर्न इंडिया टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन के विज्ञापन के अनुसार राज्य और केंद्रीय जीएसटी और अन्य करों की वजह से भारतीय यार्न वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा के लायक नहीं रह गया है। अप्रैल से जून की तिमाही में कॉटन यार्न के निर्यात में साल-दर-साल 34।6 फीसदी की गिरावट आई है। जून में तो इसमें 50 फीसदी तक की गिरावट आ चुकी है।

इसके साथ ही बताया गया है कि अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे माल की कीमत बढ़ गयी है। इस वजह से इंडियन कताई मिलों को हर किलो माल पर 20-25 रुपयों का नुकसान हो रहा है। बांग्लादेश, श्रीलंका और इंडोनेशिया में कच्चा माल सस्ता होने से वहां से ऊन और कपड़े सस्ते हैं। वहां से सस्ते दामों पर भारत में आयात हो रहा है। इस वजह से भारतीय कंपनियों का बाज़ार कमजोर हो रहा है।

गौरतलब है कि भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 10 करोड़ लोगों को रोजगार मिला हुआ है। यह एग्रीकल्चर के बाद सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला सेक्टर है। ऐसे में बड़े पैमाने पर लोगों के बेरोजगार होने की आशंका है। विज्ञापन में आंकड़ों के ऊपर लिखा गया है कि बुनकर उद्योग बड़े संकट से गुजर रहा है। कुछ ऐसा ही संकट साल 2010-11 में देखने को मिला था।

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