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पीएम मोदी 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था का सब्जबाग दिखा रहे हैं, और लोग 5 रुपये का बिस्किट नहीं खरीद पा रहे हैं !

डेस्क: देश की सबसे बड़ी बिस्किट निर्माता कंपनी पारले मंदी की वजह से 8 से 10 हजार कर्मचारियों की छंटनी कर सकती है। कंपनी का कहना है लागत के बदले कंपनी की बिक्री काफी कम हो गई है, और जीएसटी के चलते उसको काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

इंडियन एक्सप्रेस के खबर के मुताबिक कंपनी के कैटेग्री हेड मयंक शाह ने बुधवार को कहा कि बिस्किट की बिक्री खासकर ग्रामीण इलाकों में घटने की वजह से कंपनी प्रोडक्शन में कटौती कर सकती है। ऐसा होने पर कर्मचारियों की छंटनी के आसार हैं। मयंक शाह ने बताया, ‘हमने 100 रुपये प्रति किलो या उससे कम कीमत वाले बिस्किट पर GST घटाने की मांग की है। ये आमतौर पर 5 रुपये या कम के पैक में बिकते हैं। हालांकि अगर सरकार ने हमारी मांग नहीं मानी तो हमें अपनी फैक्टरियों में काम करने वाले 8,000-10,000 लोगों को निकालना पड़ेगा।

शाह ने बताया कि कन्जंपशन घटने के कारण रिटेलर्स भी प्रॉडक्ट्स लेने से पीछे हट रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘बिस्किट पर अधिक GST लागू होने से कन्ज्यूमर डिमांड घटी है। सरकार इसके लिए कोई कदम नहीं उठा रही, जिससे हालात बदतर हो गए हैं। हमारे कई ऐसे बिस्किट हैं जिन्हें मिड और लो-इनकम ग्रुप के उपभोक्ताओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है। वे हमारे जैसे ब्रांड्स के कोर कंज्यूमर हैं। हमें उम्मीद है कि सरकार डिमांड को पटरी पर वापस लाने के लिए टैक्स स्लैब घटाएगी।’ कम कीमत वाले बिस्किट कम मार्जिन पर बेचे जाते हैं।

90 साल पुरानी पारले कंपनी पारले-जी, मोनेको और मेरी गोल्ड बिस्किट का उत्पादन करती है। हाल ही में कंपनी ने प्रीमियम सेगमेंट के लिए भी कूकीज का उत्पादन शुरू किया था। पारले-जी पूरे देश में सबसे ज्यादा बिकने वाला बिस्किट है। कंपनी की पूरे देश में 10 फैक्ट्रियां हैं, जहां पर एक लाख लोग काम करते हैं। इसके अलावा 125 थर्ड पार्टी प्लांट भी हैं, जहां बिस्किट का उत्पादन किया जाता है। कंपनी के उत्पादों की सबसे ज्यादा बिक्री ग्रामीण भारत में होती है। बता दें कि पारले की सेल्स 10,000 करोड़ रुपये सालाना से ज्यादा होती है।

देश की एक अन्य बड़ी बिस्किट और डेयरी प्रॉडक्ट्स कंपनी ब्रिटानिया के मैनेजिंग डायरेक्टर वरुण बेरी ने पिछले हफ्ते कहा था कि कन्ज्यूमर 5 रुपये के बिस्किट पैकेट भी खरीदने में कतरा रहे हैं। उन्होंने कहा था कि वे 5 रुपये के भी प्रॉडक्ट्स खरीदने पहले दो बार सोच रहे हैं, जिससे वित्तीय समस्या की गंभीरता का पता चलता है। बेरी ने कहा था, ‘हमारी ग्रोथ सिर्फ छह पर्सेंट हुई है। मार्केट ग्रोथ हमसे भी सुस्त है।’ नुस्ली वाडिया की कंपनी ब्रिटानिया का साल-दर-साल का शुद्ध लाभ जून तिमाही में 3.5 पर्सेंट घटकर 249 करोड़ रुपये रहा।

पांच ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का सपना देखने वाले पीएम मोदी के देश का यह हाल बहुत कुछ बयां कर रही है।

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