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कारगिल युद्ध में पाकिस्तान को धूल चटाकर राष्ट्रपति पदक से सम्मानित योद्धा को कंद्र सरकार ने विदेश घोषित कर दिया !

डेस्क: असम में बहुप्रतीक्षित राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) की फ़ाइनल लिस्ट शनिवार को ऑनलाइन जारी कर दी गई। गृह मंत्रालय द्वारा जारी इस लिस्ट में असम रह रहे 19 लाख से ज्यादा लोगों का नाम नहीं है। उन 19 लाख लोगों में भारतीय सेना के पूर्व आर्मी ऑफिसर मोहम्मद सनाउल्लाह भी हैं। जिन्हें विदेशी अधिकरण द्वारा ‘विदेशी’ घोषित किए जाने के बाद इस वर्ष मई में कुछ दिनों तक हिरासत में रखा गया था। इस लिस्ट में सनाउल्लाह की दोनों बेटी और एक बेटे का नाम भी गायब है, हालांकि सनाउल्लाह की पत्नी का नाम इसमें शामिल है। बता दें कि भारतीय सेना के जूनियर कमीशंड ऑफिसर (जेसीओ) के पद से सेवानिवृत्त मोहम्मद सनाउल्लाह कारगिल युद्ध में हिस्सा लिया था और उन्हें राष्ट्रपति पदक मिल चुका है।

NRC के अंतिम सूचि में उनका नाम नहीं होने को लेकर फेसबुक पर किसी विक्रम सिंह चौहान का लिखा एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। पोस्ट में लिखा है, ’32 साल बार्डर पर देश की रक्षा किया।कारगिल युद्ध में पाकिस्तान को फौजी भाइयो के साथ मुहतोड़ जवाब दिया।राष्ट्रपति पदक भी उन्हें दिया गया।जम्मू-कश्मीर और नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों के काउंटर इंसरजेंसी ऑपरेशंस (घुसपैठ रोधी अभियान) का हिस्सा भी रह चुके हैं फिर भी असम के मोहम्मद सनाउल्लाह को बता दिया गया कि कागज़ों में आप भारतीय नागरिक नहीं हैं। मई में उन्हें गिरफ्तार कर डिटेंशन कैम्प भेज दिया गया था। अब उम्र के इस पड़ाव में उन्हें साबित करना है कि वे भारतीय ही हैं।उन्हें चक्कर लगाने हैं विदेशी न्यायाधिकरण(फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल) ऑफिस का,गुवाहाटी हाई कोर्ट का।और अगर कागज़ों में वे साबित नहीं कर पाए तो 19 लाख अन्य लोगों के साथ जो होगा वहीं उनके साथ भी होगा।ये सिला दिया है उस देश ने जिसकी रक्षा उन्होंने भूखे,प्यासे रहकर 32 साल तक की है।क्या सेना में 32 साल की सेवा साबित नहीं करती कि वे हमसे कहीं ज्यादा भारतीय हैं?’

बता दें कि मोहम्मद सनाउल्ला को इस साल मई के महीने में ट्रब्यूनल की तरफ से विदेश घोषित कर असम के एक डिटेंशन कैम्प में भेज दिया था। जिसके बाद गुवाहाटी हाईकोर्ट की तरफ से उन्हें राहत मिली। हालांकि, हाईकोर्ट ने फॉरनर्स ट्रब्यूनल के पहले के आदेश को निरस्त नहीं किया, जिसें सनाउल्लाह को विदेशी करार दिया गया है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस याचिका पर सुनवाई आगे जारी रहेगी।

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