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अपने ही देश में 22 साल से शरणार्थी हैं 40 हजार हिंदू ‘ब्रू’ जनजाति, नहीं सुन रही सरकार

डेस्क: दिल्ली के कनॉट प्लेस में घूमते हुए कुछ लोगों ने जबरन एक पर्चा पकड़ा दिया। शुरू में लगा कि अपने व्यापारिक संस्थान या दिल्ली विश्वविद्यालय में हो रहे छात्रसंघ के चुनाव से सम्बंधित कोई पर्चा होगा लेकिन पर्चा पढ़ते ही लगा कि मुझे उनलोगों से बात करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि वे पूर्वोत्तर भारत के मिजोरम के ब्रू यानी रियांग जनजाति के हैं । ये बिल्कुल ही वैष्णव हिन्दू हैं जिन्हें 22 साल पहले ईसाई बहुल मिजोरम से खदेड़ दिया गया था। लगभग 40 हजार ब्रू जनजाति अपनी जमीन से बेदखल कर दिये गए। 41 गाँवो के 1400 घर जला दिए गए। ह’त्या और रे’प भी किये गए। भागकर इन्होंने सीमावर्ती त्रिपुरा के कंचनपुर और पानीसागर की पहाड़ियों में शरण ली । 22 सालो से ये आजीविका , मताधिकार , शिक्षा , स्वास्थ्य ,आधार कार्ड और मूलभूत समस्याओ से जूझ रहे हैं ।

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केंद्र में मोदी की सरकार और त्रिपुरा में भाजपा की सरकार बनने के बाद इनकी उम्मीदों को हवा मिली है। 3 जुलाई 2018 को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मिजोरम त्रिपुरा और केंद्र सरकार के साथ समझौता भी हुआ । फैसला हुआ कि हर परिवार को 4 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट , घर बनाने के लिए डेढ़ लाख रुपये , दो साल का राशन मुफ्त और हर महीने 5 हजार रुपये दिए जाएं । लेकिन सुरक्षा , स्वायत्तता और जमीन सम्बन्धी मांग पूरी नही होने के कारण कुछ नेताओं ने समझौता रदद् कर दिया। अब फिर से यह हिन्दू जनजाति अपने अधिकार से वंचित हो गयी है। ये चाहते हैं कि इनका पुनर्वास समूह में हो ताकि सुरक्षा को लेकर ये निश्चिंत रहे । इन्हें मंदिर के लिए जमीन चाहिए और केंद्र द्वारा प्रस्तावित सुविधाये चाहिए। सबसे बड़ा संकट यह है कि सरकार 16 सिंतबर से इनकी वापसी चाहती है वरना 1 अक्टूबर से इनको मिल रहा अनुदान बन्द कर दिया जाएगा।

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मोदी सरकार से भरोसा है कि 32 हजार 876 राष्ट्रभक्त ब्रू हिन्दुओ को उनका हक मिलेगा । बांग्लादेशी घुसपैठिये और रोहिंग्या मुसलमानो ने तो जबरन देश की संपत्ति पर अपना हक जमा लिया लेकिन ब्रू हिन्दुओ के लिए किसी की जुबान नही खुली । अब तक तो हम कश्मीरी पंडितों के लिए आंसू बहा रहे थे । लेकिन इन वैष्णव हिन्दुओ की आवाज कोई नही सुन रहा है । तिब्बतियों की तरह अपने निर्वासन को लेकर इन्होंने भी सितंबर महीने मे सघन जनसंपर्क अभियान चलाने का फैसला किया है।आपकी जानकारी के लिए यह भी बताता चलूँ कि मिजोरम में ब्रू जनजाति ही है जो भारतीय संविधान के लिए कृतसंकल्प हैं। आजादी की लड़ाई में भी इनकी जोरदार भूमिका थी।

आइये इनके लिए हम आवाज बने । इन्होंने आग्रह किया कि सोशल मीडिया में इनकी बाते आये तो लोगों को जानकारी मिलेगी कि देश मे ही कैसे अपने लोग शरणार्थी बने हुए है। आपसे भी आग्रह है कि इस खबर को शेयर करें ताकि लोग जाने तो कि देश के लिए रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों से ज्यादा जरूरी यह समुदाय है । सेक्युलर लोग नही बोलेंगे तो क्या राष्ट्रभक्त भी चुप लगा जाएं।

 सीनियर जर्नलिस्ट योगेश किसलय के फेसबुक टाइमलाइन से 

डिस्क्लेमरइस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता व् सच्चाई के प्रति ख़बरीलाल  उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं।

 

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