बिहार राज्य

प्रयोग के बिना ज्ञान अधूरा-डॉ एस के सिंह

दरभंगा: शिक्षा-प्राप्ति का उद्देश्य मात्र जानकारी हासिल कर जीविकोपार्जन करना ही नहीं है,बल्कि प्राप्त ज्ञान का समाजहित में सकारात्मक उपयोग आवश्यक है।प्रयोग के बिना ज्ञान अधूरा है।समाज के दूसरे व्यक्तियों के साथ तारतम्यता बैठाना तथा वातावरण से तालमेल बनाए रखना ही ज्ञान का सदुपयोग है।हमारी ज्यादा जिम्मेदारी है कि हम सब अपने समाज और राष्ट्र को निरंतर आगे बढ़ाएं।यूं तो शिक्षारंभ व्यक्ति के जन्म के साथ ही प्रारंभ हो जाता है,पर यहां स्नातक एवं स्नातकोत्तर का दीक्षारंभ अपना विशेष महत्त्व रखता है। उक्त बातें मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सुरेंद्र कुमार सिंह ने सी एम कॉलेज,दरभंगा के कर्पूरी-ललित भवन में स्नातक प्रथम खंड तथा स्नातकोत्तर प्रथम सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं के लिए आयोजित इंडक्शन प्रोग्राम का दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन करते हुए कहा। उन्होंने नव नामांकित छात्र-छात्राओं का विश्वविद्यालय की ओर से स्वागत करते हुए कहा कि यह महाविद्यालय विश्वविद्यालय में ही नहीं,वरन प्रदेश में भी अव्वल है।शिक्षक दिवस के अवसर पर दीक्षारंभ की शुरुआत सुखद लग रहा है।इस अवसर पर उन्होंने शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए छात्रों से कहा कि आप बड़े भाग्यशाली हैं कि आपका नामांकन इस प्रतिष्ठित महाविद्यालय में हुआ है।इस महाविद्यालय ने अनेकानेक उपलब्धियां हासिल की हैं, जिनमें प्रधानाचार्य के साथ ही यहां के शिक्षकों एवं छात्र- छात्राओं का भी महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। बेहतर भविष्य हेतु छात्रों एवं शिक्षकों को कदम से कदम मिलाकर चलना आवश्यक है। यहां छात्र विभिन्न क्षेत्रों से पढने आते हैं,जिन्हें कॉलेज की विशेष जानकारी,इसके उद्देश्यों, उपलब्धियां तथा सुविधाओं के बारे में विशेष जानकारी इन 6 दिनों के कार्यक्रम में मिलेगी।उन्होंने समय का सम्मान करते हुए उसके सदुपयोग का छात्रों से आह्वान किया।कुलपति ने महाविद्यालय की उपलब्धियों की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए छात्रों से कहा कि अनुशासन,समयपालन, कठिन मेहनत तथा धैर्य ही जीवन में सफलता दिलाता है। अंत में उन्होंने सभी नव नामांकित छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल एवं मंगलमय भविष्य की कामना की।

इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रधानाचार्य डॉ मुश्ताक अहमद ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है, क्योंकि आज सी एम कॉलेज में एक नया अध्याय जुड़ रहा है।वर्तमान कुलपति के नेतृत्व में विश्वविद्यालय कि न सिर्फ तस्वीर,बल्कि तकदीर भी बदल रही है।परीक्षाओं का नियमितीकरण हो,दीक्षांत समारोह का आयोजन हो, नैक मूल्यांकन हो या इंडक्शन प्रोग्राम का आयोजन हो,सबमें मिथिला विश्वविद्यालय प्रदेश में आगे आ रहा है।प्रधानाचार्य ने कुलपति को आश्वस्त किया कि हमारा महाविद्यालय विश्वविद्यालय,सरकार तथा यूजीसी के सभी निर्देशों को पूरा करने में हमेशा आगे रहेगा।उन्होंने कहा कि छात्र नियमित रूप से समय पर वर्ग में उपस्थित हो तो वे न सिर्फ डिग्री प्राप्त करेंगे,बल्कि व्यावहारिक ज्ञान के साथ समाज से भी जुड़ेंगे। महाविद्यालय का नेट, बीपीएससी,सीटेट आदि का अल्पसंख्यक कोचिंग छात्रों को मुख्यधारा से जोड़ने का काम कर रहा है।यह महाविद्यालय सांस्कृतिक गतिविधि,खेलकूद,एनएसएस तथा एनसीसी में हमेशा आगे रहा है।कथनी और करनी में अंतर नहीं होना चाहिए। छात्र शिक्षकों के मार्गदर्शन में ही अच्छा इंसान बन सकते हैं। प्रधानाचार्य ने कहा कि महाविद्यालय के पुस्तकों का बारकोडिंग किया गया है।यहां का लाइब्रेरी ई-लाइब्रेरी बन चुका है।छात्र कहीं से भी पुस्तकालय का लाभ उठा सकते हैं।छात्र महाविद्यालय के नियमों का पालन करें तथा नियमित रूप से वर्ग आएं। अन्यथा उनका नाम काटकर उनके घर सूचनार्थ भेज दिया जाएगा।
इस अवसर पर कुलपति ने हाल ही में अवकाश प्राप्त महाविद्यालय के दो शिक्षकों डॉ मोहम्मद मोहसीन, समाजशास्त्र विभाग तथा डॉ विजय कुमार झा,गणित विभाग को पार्क,चादर तथा माला पहनाकर सम्मानित किया। प्रधानाचार्य ने पाग, चादर तथा शिशु पौधा प्रदान कर कुलपति का स्वागत किया। कार्यक्रम में सभी शिक्षक,शिक्षकेतर कर्मी तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।डॉ आर एन चौरसिया के निर्देश पर एनएसएस के 20 स्वयंसेवक तथा एनसीसी के 20 कैडेट मो अशलम,शालू कुमारी तथा संतोष कुमार के नेतृत्व में अपना सराहनीय योगदान किया।कार्यक्रम का संचालन करते हुए अंग्रेजी विभागाध्यक्षा प्रोफेसर इंदिरा झा ने महाविद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं की विस्तृत चर्चा करते हुए बताया कि अब तक इस सत्र में 3346 छात्र-छात्राओं ने स्नातक प्रथम खंड में तथा 1680 स्नातकोत्तर प्रथम सेमेस्टर में नामांकन लिए हैं।आगत अतिथियों का स्वागत शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ अमरेंद्र शर्मा ने तथा धन्यवाद ज्ञापन सचिव प्रो नारायण झा ने किया।

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