बिहार राज्य

स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है: डा. मुश्ताक अहमद

दरभंगा: सी एम कॉलेज,दरभंगा में चल रहे छह दिवसीय इंडक्शन प्रोग्राम के तहत चौथे दिन महाविद्यालय के विभिन्न विभागों द्वारा विषय- विशेषज्ञों के माध्यम से विशेष व्याख्यान आयोजित किए गए। साथ ही छात्रों के व्यक्तित्व विकास एवं चरित्र- निर्माण से संबंधित विभिन्न तरह के कार्यक्रम तथा प्रतियोगिताएं आयोजित की गई। प्रधानाचार्य डा मुश्ताक अहमद में विभिन्न विभागों में जाकर शिक्षकों एवं छात्रों से बातचीत की तथा प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इन कार्यक्रमों से महाविद्यालय में नई ऊर्जा का संचार हो रहा है। इससे छात्रों का परिसर की ओर झुकाव बढ़ता जा रहा है। अंग्रेजी विभाग द्वारा आयोजित योग-कक्षा का उद्घाटन करते हुए प्रधानाचार्य ने कहा कि फीट इंडिया अभियान में योग का अत्यधिक महत्व है। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है।योग विशेषज्ञ आर बी ठाकुर ने योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आसन एवं प्राणायाम की विधियों की विशेष जानकारी दी।विभागाध्यक्षा प्रोफेसर इंदिरा झा ने आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि योग से चिंतन एवं मनन की शक्ति बढ़ती है।डॉ अमरेंद्र शर्मा ने भी छात्रों से योग के महत्व को बताते हुए इसे जीवन में अपनाने का आह्वान किया।पूरे कार्यक्रम में डॉ तनिमा कुमारी ने सक्रिय योगदान दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ प्रीति कनोडिया ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर मंजू राय ने किया। अर्थशास्त्र विभाग के तत्त्वावधान में स्वशरीर की मानवीय आवश्यकताएं विषय पर स्मार्ट क्लास में साधनसेवी योगाचार्य कमलेश कुमार के द्वारा विशेष व्याख्यान प्रस्तुत किया गया, जबकि द्वितीय सत्र में डॉ तनिमा कुमारी ने अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर डॉ अवनि रंजन सिंह,प्रो रमन बिहारी लाल, प्रो शिप्रा सिन्हा,डॉ रीना कुमार,प्रो विकास कुमार, प्रो यादवेंद्र सिंह आदि उपस्थित थे।

उर्दू विभाग में इतिहास भाषा तथा भाषा इतिहास के स्रोत विषय पर साधनसेवी डॉ नरेंद्र झा ने अपने विचार व्यक्त किए।इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ जफर आलम, प्रो एहतेशामुद्दीन तथा डा मो अशदुल्ला आदि उपस्थित थे।मैथिली एवं हिंदी विभाग में साधनसेवी के रूप में विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर अशोक कुमार मेहता ने युवाओं के व्यक्तित्व सर्वांगीण विकास विषय पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त करते हुए स्वाध्याय के महत्व एवं परीक्षाओं के लिए अच्छे प्रश्नोत्तरी के गुर सिखाए।इस अवसर पर डॉ अभिलाषा कुमारी तथा प्रो रागिनी रंजन उपस्थित थे।समाजशास्त्र विभाग में साधनसेवी के रूप में डॉ एकता श्रीवास्तव ने शरीर एवं मस्तिष्क की महत्ता एवं संतुलित विकास की चर्चा करते हुए व्यक्तित्व के संतुलित एवं पूर्ण विकास से जुड़े हुए तथ्यों की व्याख्या की तथा छात्र-छात्राओं को खुशहाल एवं तरोताजा रहने का संदेश दिया। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रोफेसर विश्वनाथ झा,डॉ प्रभात कुमार चौधरी,प्रो राफिया आदि उपस्थित थे।

स्नातकोत्तर मनोविज्ञान विभाग के तत्वावधान में साधनसेवी के रूप में सामाजिक विज्ञान के संकायाध्यक्ष प्रो अनिल कुमार झा ने मनोविज्ञान विषय की व्यापकता की चर्चा करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के विकास में इसका अत्यंत ही महत्वपूर्ण योगदान है।उन्होंने मनःस्थिति पर विस्तार से बताते हुए इसके महत्व को व्यक्ति के विकास से संबद्ध बतलाया।दूसरे सत्र में मेंटरी विद यूनिवर्सल वैल्यू के अंतर्गत वूमेन नीड्स सेल्फ एंड बॉडी विषय के अंतर्गत व्यक्ति के मन एवं शरीर के संबंध एवं उनके समरूप व्यवहार पर होने वाले प्रभाव पर चर्चा किया गया।इस सत्र में रिसोर्स पर्सन के रूप में डॉ विजय सेन पांडे एवं डॉ एकता श्रीवास्तव ने विचार व्यक्त किए।तीसरे सत्र का संचालन करते हुए डॉ मो जिया हैदर ने युवाओं से लिटरेरी एक्टिविटी के अंतर्गत सामाजिक समस्या पर वाद-विवाद एवं परिचर्चा करवाया।अंत में बच्चों के चिंतास्तर को मापने के लिए चिंतास्तरमाफी का उपयोग कर उनका मनोवैज्ञानिक विश्लेषण किया गया।इस सत्र का संचालन डॉ नथुनी यादव एवं डॉ पुनीता कुमारी ने किया।

वहीं संस्कृत,गणित एवं दर्शनशास्त्र विभाग के तत्वावधान में आयोजित इंडक्शन प्रोग्राम में संसाधन पुरुष के रूप में मिल्लत कॉलेज के समाजशास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ भक्तिनाथ झा ने युवाओं के सामाजिकीकरण विषय पर बोलते हुए कहा कि मानव ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना है,इसे एक सामाजिक एवं विवेकशील प्राणी कहा जाता है। जन्म के समय वह मात्र एक जैविक प्राणी होता है जो सद् व्यक्तियों के संपर्क से सामाजिक प्राणी बनता है।यू समाजिकीकरण की प्रक्रिया जन्म से मृत्यु पर्यंत चलती रहती है।परिवार समाजिकीकरण का सर्वोत्तम पाठशाला होता है। फिर आस-पड़ोस,स्कूल-कॉलेज, धर्म-कानून आदि से व्यक्ति का समाजिकीकरण होता है। उन्होंने छात्रों से कहा कि सूरज की तरह चमकना है तो पहले सूरज की तरह जलना सीखो।द्वितीय सत्र में युवाओं के व्यक्तित्व विकास विषय पर चर्चा करते हुए फिल्म निदेशक ललित झा ने युवाओं से कहा कि प्रखर व्यक्तित्व हमें जीवन-पथ पर आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करता है।समाजिकीकरण तथा व्यक्तित्व एक-दूसरे के पूरक होते हैं।सर्वप्रथम व्यक्तित्व- विकास की नींव परिवार में ही पड़ती है।फिर हम मानवीय मूल्यों को सीखते हैं।समाज हमें सामूहिकता सिखाता है। शिक्षण संस्थाओं का हमारे व्यक्तित्व के विकास पर गहरा प्रभाव पड़ता है।संप्रेषणियता अच्छे व्यक्तित्व के लिए आवश्यक है।

राकेश कुमार शाह की रिपोर्ट

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Social Activist
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