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अगर जेएनयू ने बहुत सारे विद्वान को पैदा किया तो दूसरी यूनिवर्सिटीज ने घास काटने वाले को पैदा किया क्या?

जिनकी औकात नहीं है कि वह जेएनयू के प्रश्न पत्र को पढ़ उसका अर्थ भी समझ सकें वह भी जेएनयू पर ज्ञान दे रहे हैं।

बात एकदम सही है।
चमनजी आप भी शिक्षाविद नहीं है, अर्थशास्त्र का अ नहीं जानते हैं आप किस मुँह से ज्ञान की वर्षा करते हैं।
जीवन में कभी कश्मीर नहीं गए होंगें तो आप कैसे ज्ञान देते हैं।

अगर जेएनयू ने बहुत सारे विद्वान को पैदा किया तो दूसरी यूनिवर्सिटीज ने घास काटने वाले को पैदा किया क्या? आप दूसरे यूनिवर्सिटीज के बारे में कितना जानते हैं? चमनजी जेएनयू की बात छोड़िए आप तो खुद के यूनिवर्सिटी के बारे में नहीं जानते हैं।

जेएनयू एक सुविधा सम्पन्न यूनिवर्सिटी से है जिसे अजस्र फंड दिया जाता है। जेएनयू को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रोजेक्शन दिया गया। अगर यही ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी को मिलता तो आपके जेएनयू को कोई नहीं पूछता।

ज्ञान, गंभीरता व प्रतिष्ठा के मामले में जेएनयू कलकत्ता विश्वविद्यालय इलाहाबाद विश्वविद्यालय का मुकाबला कर सकता है क्या? जेएनयू भारत का ऑक्सफोर्ड है। इससे पहले पटना यूनिवर्सिटी को पूर्व का ऑक्सफोर्ड कहा गया था।

यह जो ज्ञान की गंगा बहाए हुए हैं और छड़प रहे हैं यह तड़प कभी अपने जिले और राज्य के यूनिवर्सिटी के लिए भी दिखाते।

मतलब यह हुआ कि जिसने जेएनयू में पढ़ लिया वह सबसे महान हुए। यहाँ के छात्र देश के अन्य हिस्से के छात्रों से दो शताब्दी आगे हैं। आपके पिता ने कहाँ से पढ़ाई की थी? आपने कहाँ से किया था? अपने यूनिवर्सिटी की चर्चा करते शर्म आती है क्या?
यूनिवर्सिटी से किसी का विरोध नहीं है। लेकिन अगर बुराइयां किसी संस्थान में घर बना चुकी है तो उस संस्थान का नाश निश्चित है। जेएनयू कोई और इसके उस श्रेणी के कतिपय छात्र कोई देवदूत नहीं हैं कि प्रश्न खड़ा नहीं किया जा सकता है।

बस जेएनयू के छात्र सच बोलने का माद्दा रखते हैं। आप क्या माद्दा रखते हैं? आप अपने घर के बगल के सरकारी स्कूल की बदहाली पर बोलने से परहेज करते हैं।
आपको ऐतराज है कि जेएनयू को कुछ लोग राष्ट्रविरोधी गतिविधि का अड्डा कहते हैं। कुछएक लोग इस तरह की हरकत करें इनसे पूरे संस्थान को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।

जरा अपना इतिहास पलट कर देख लीजिए आप भी कभी काशी हिंदू विश्वविद्यालय को दक्षिणपंथी का अड्डा कह तिरस्कार किया करते थे।

आलेख वरिष्ठ पत्रकार विजय देव झा जी के फेसबुक टाइमलाइन से

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