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हैदराबाद एनकाउंटर: अब हमें संविधान न्यायतंत्र कोर्ट कानुन सबको उठाकर फेक देना चाहिए !

डेस्क: अब हमें संविधान न्यायतंत्र कोर्ट कानुन सबको उठाकर फेक देना चाहिए… ओर ऐसे ही पुलिसिया न्याय होना चाहिए पुलिस जिसको चाहे उठा ले और ठोक दे …

आप जरा सोचिए मान के चलिए कल को आपको बलात्कार के आरोप में फंसा दिया गया और जैसे कि देश में आक्रोश होता है जला डालो मार डालो काट डालो और पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया और बता दिया कि कस्टडी से भाग रहा था फिर क्या होगा क्या ऐसा करना सही होगा …

क्या हमें इस बात पर जोङ नहीं देना चाहिए कि न्यायतंत्र बेहतर से बेहतर हो जल्दी न्याय हो और अगर आरोप सिद्ध होता है तो उचित कार्रवाई हो कानुन के हिसाब से फांसी हो जाए हमें कोई दिक्कत नहीं पर सीधे ठोक देना ये कहां से बेहतर है…

हमें और आपको तो बता दिया गया कि वो रेपिस्ट थे लेकिन अगर हमसे कोई पुछ दे कि आपने इस बात को कैसे मान लिया कि वो ही असली गुनेहगार थे तो हम क्या जवाब देंगे कि पुलिस ने पकङा है इस वजह से… क्या और कोई जवाब होगा हमारे पास…??? क्या पुलिस ने जिसको पकङा वो ही रेपिस्ट थे इस बात पर सिर्फ इसलिए विश्वास कर लें क्योंकि पुलिस ने पकड़ लिया क्या पुलिस के द्वारा पकङा जाना ही काफी है दोष सिद्धि के लिए…

गलत अर्थ नही लिजिएगा मैं कतई रेपिस्ट के साथ नहीं हुं और जो भी रेपिस्ट है उसे कानुनी तरीके से फांसी मिलनी ही चाहिए पर सवाल तो यहां बनते हैं न…

कानुन बने और तुरत ट्रायल होके तुरत फांसी हो ऐसा करने में दिक्कत क्या है… हमारे पास कोर्ट कानुन क्यों है पुलिसिया न्याय के लिए तो नहीं न…

अगर ऐसे चीजों को बढ़ावा देंगे तो हो सकता है कल को कोई रसुखदार अपराधी निर्दोष को ही पकङवा के पुलिस के हाथो एनकाउंटर करवा दे या पुलिस किसी को भी उठाकर आरोपी बताके एनकाउंटर कर दे और बोल दे कि कस्टडी से भाग रहा था…

ऐसा न्याय तो हमें नहीं चाहिए न…

✍️सौम्यध्रुव प्रेम की वाल से

Desk
Social Activist
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