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विचार: देश के अल्पसंख्यकों ने आज जो किया है, इसका सारा दोष सेक्युलर फोर्सेस के माथे जाना चाहिए !

डेस्क: मुझे इस बात में रत्ती भर भी संदेह नहीं कि विपक्ष के किसी नेता के पास डिप्लोमेसी अब बिल्कुल भी नहीं बची है। सैक्युलर अब जरूरत से ज्यादा लिबरल हो गये हैं, उनकी सेक्यूलरिज्म को लेकर कट्टरता में कमी आ रही है। वे विचारों को सुन कर अपना विचार बदल रहे हैं।

देश में कई तरह की ताक़तें काम कर रही है। लेकिन कुछ ताकतों ने देश को काफी प्रभावित किया है। वामपंथी, सेक्युलर, समाजवादी और दक्षिणपंथी। इनकी बातें लोगों तक अधिक पहुँची है। लेकिन, जीत उसकी हुई है जो सही-गलत दोनों स्थिति में अपने विचारों के साथ खड़ा रहा है।

वामपंथ में कुछ खामियां दिखी। लोगों ने इसका साथ छोड़ना शुरू कर दिया। इसके खुद के प्रचारकों ने भी झुक कर बात करना शुरू कर दिया। लिहाज़ा ये सिमटते चले गये। सेक्युलरों की स्थिति आप देख ही रहे हैं। ये जैसे जैसे विश्वविद्यालयों के तरफ बढ़ते जा रहे हैं, ये दक्षिणपंथियों के फैलाये भ्रम में भ्रमित होते जा रहे हैं। समाजवादियों ने पारिवारिक सत्ता के लालच में पहले ही अपना मट्टीपलित करबा लिया है।

ऐसे में दक्षिणपंथियों ने बड़े सूझ-बूझ के साथ एक खेल खेला। खेल में जंगलराज, अंधा-कानून, दंगा-प्रदेश, मुसलमान परस्ती, भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ़ अपराध, राष्ट्रवाद, महंगाई और बेरोजगारी जैसे शब्दों को मोहरा बनाया। एक ही बात हज़ार बार बोला। कई तरह की भ्रांतियां फैलायी। लिहाजा, कांग्रेस, राजद, सपा, बसपा सरीखें कई राजनीतिक दलों ने अपना विश्वास खोया।

सत्ता में दक्षिणपंथी आये। कई राज्यों में अनैतिक गठबंधन हुई। कई ऐसे राजनेताओं को साथ लिया जिनपर वे खुद सैकड़ों तरह के आरोप लगाते रहे। लेकिन, अपने हर सही-गलत फैसलों को अपने बेतुके बयानों और तर्कों से लोगों के बीच सही साबित करता रहा। क्योंकि इन्हें पता चल गया था। एक जेनरेशन तैयार हो गया है, जो सिर्फ यही पूछेगा – तब कँहा थे? जब कांग्रेस के टाइम में ये सब हो रहा था?

दक्षिणपंथियों ने लोगों का इस तरह से ब्रैनवास किया, लोगों ने इनके हर सही गलत बात को फ्रंट पर आकर समर्थन दिया। उन्हें कभी लगा ही नहीं, ये गलत है। उन्हें लगता है, अगर ये तब हो सकता था, तो आज क्यों नहीं होगा?

अगर आज भी देश की बाकी ताक़तें एक-साथ न भी आकर, अलग-अलग रह कर भी सिर्फ अपने विचारों पर कट्टर होकर अविचल हो जाये, दक्षिणपंथी अपने कदम पीछे कर लेंगे। देश के अल्पसंख्यकों ने आज जो किया है, इसका सारा दोष सेक्युलर फोर्सेस के माथे जाना चाहिये। अगर ये इस मुद्दे को मुसलमान वाले एंगल पर डाइवर्ट नहीं होने देते तो आज ये स्थिति नहीं होती देश की।

आलेख: स्वतंत्र स्तंभकार रोहित यादव जी के फेसबुक टाइमलाइन से

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