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विचार: जो बात रामचंद्र गुहा को समझ में आती है, वो कांग्रेस के ‘चमचों’ को क्यों नहीं आती है ? पढ़ें

डेस्क: जो बात रामचंद्र गुहा को समझ में आती है वो चमचों को समझ में नहीं आती है. ख़ास कर कांग्रेस द्वारा फेंकी गई हड्डियो को चाट कर वामपंथी विमर्श करने वाले लोगों को.

चमचे कभी भी नहीं समझ पायेंगे कि आज सत्ता में बैठी पार्टी जवाहरलाल नेहरु को गाली सिर्फ और सिर्फ इसलिए दे पा रही है क्यूंकि उनकी चौथी/पांचवी पीढ़ी उनके नाम पर कांग्रेस जैसी मध्यम मार्गीय पार्टी को अपनी बपौती बनाए हुए हैं.

जवाहरलाल नेहरु के वंशज यदि आज कांग्रेस को अपनी जेबी पार्टी नहीं बनाए होते तो अभी नरेन्द्र मोदी ये कह रहे होते कि कांग्रेस जवाहरलाल नेहरु के आदर्शों को भूल गई है. भले ही, मोदी खुद नेहरु के आदर्शों में आस्था रखते हों या नहीं, वो उन आदर्शों की दुहाई जरुर दे रहे होते.

जवाहरलाल नेहरु आज अपने परिवार की वज़ह से गालियाँ सुन रहे हैं. जितने भी महान नेता हुए हैं गलतियां सब ने की है. नेल्सन मंडेला से भी गलतियाँ हुई हैं. मगर जवाहरलाल नेहरु ही किसी सत्ताधारी पार्टी से ऐसी हिकारत झेल रहे हैं.

मोदी/संघ की आस्था नेहरु में भी नहीं है, महात्मा गांधी में भी नहीं है. मगर दिखावे के लिए ही सही, मोदी जी को महात्मा गांधी के नाम पर स्कीम चलाना पड़ता है. उन्हें नमन करना पड़ता है. सिर्फ इसलिए, क्यूंकि कांग्रेस पार्टी तुषार गांधी, गोपाल कृष्ण गाँधी और राजमोहन गाँधी की जेबी पार्टी नहीं है.

दुःख की बात ये है कि परिवार द्वारा फेंकी गई हड्डियो को चाटने वाले लोग इस देश में चिन्तक कहलाते हैं. वो चाहते हैं कि लोग उन्हें माफ़ कर दे क्यूंकि विपक्षी पार्टिओं की तरह वो सिर्फ मोदी के खिलाफ भौंकते रहते हैं. मेरे लिए ऐसे लोग गली के आवारा कुत्तों से ज्यादा महत्व नहीं रखते.

आलेख: पंकज के चौधरी के फेसबुक वॉल से

डिस्क्लेमर: आलेख में व्यक्त किया गया विचार लेखक का निजी विचार है। यह आलेख ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई है।

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