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क्या CAA आर्टिकल 14 का उल्लंघन करता है ? आसान भाषा में समझने के लिए क्लिक करें

डेस्क: CAA का एक मात्र उद्देश्य असम NRC में बाहर हुए चौदह लाख हिंदुओ को देश की नागरिकता प्रदान करना है , बाँकि कोई मतलब नहीं है इस क़ानून का ।

क्या यह ग़ैर संवैधानिक है ?
नहीं , संसद के पास यह अधिकार है कि वो ऐसा क़ानून बना सकती है ।

क्या यह आर्टिकल 14 वायलेशन है ?

बिल्कुल नहीं , भारत के संविधान में यह कहा गया है कि राज्य, भारत के राज्य क्षेत्र में किसी व्यक्ति को कानून के समक्ष समता से या कानून के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा।

भारतीय संविधान के आर्टिकल 14 के हिसाब से इसका मतलब यह है कि सरकार भारत में किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं करेगी, लेकिन आर्टिकल 14 में कहीं भी नागरिक या विदेशी शब्द का ज़िक्र नहीं है ।

चूँकि आर्टिकल 14 काफ़ी ब्रॉड और जेनरल है इसलिये जब बात नागरिक और ग़ैर नागरिक की आती है तो संविधान के उस आर्टिकल को देखा जाना चाहिये जो इसकी बात करता है ।

विधि का व्याख्या करने का सामान्य विज्ञान है । अगर संविधान का कोई आर्टिकल जेनरल है और कोई आर्टिकल स्पेसिफ़िक , हमेशा स्पेसिफ़िक आर्टिकल को ही पहली प्रायऑरिटी मिलेगी ।

उदाहरण के लिये ,

कोई X आर्टिकल है संविधान में जो कहता है कि पब्लिक प्लेस में अगर कोई व्यक्ति दारु पीते पकड़ा गया तो उसको दस साल की सज़ा होगी ।

एक और Y आर्टिकल है संविधान में जो कहता है की पब्लिक प्लेस में अगर कोई देश का नागरिक दारु पीते पकड़ा गया तो उसको दस साल की सज़ा होगी ।

एक और आर्टिकल Z है संविधान में जो कहता है की पब्लिक प्लेस में अगर कोई विदेशी नागरिक दारु पीते पकड़ा गया तो उसको कोई सज़ा नहीं होगी ।

अब मान लीजिये , कोई न्यूजीलैंड का आदमी पब्लिक प्लेस में पकड़ा गया दारु पीते हुए , तो उसको सज़ा किस आर्टिकल के हिसाब से होनी चाहिये ?

जवाब अगर Z है तो मैं मानता हूँ आपको बात समझ आ गयी होगी ।

क्या इस क़ानून से देश के मुसलमानो की नागरिकता छीन ली जायेगी ?
नहीं, ये सफ़ेद झूठ है

क्या इस क़ानून से असम NRC में बाहर हुए मुसलमानो की नागरिकता छीन ली जायेगी ?
उनकी छीनी जा चुकी है

क्या यह क़ानून धर्म के आधार पर भेद भाव करता है ?
हाँ , बिलकुल !

तो क्या यह आर्टिकल 14 का वायलेशन नहीं है ?
आप फिर से पोस्ट पढ़िये ।

आलेख: धैर्यकांत जी के फेसबुक टाइम लाइन से

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Social Activist
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