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86% लोगों का मानना है कि PM मोदी बेरोजगारी पर चर्चा से डरते हैं: सर्वें

डेस्क: सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी  (CMIE) के द्वारा जारी आंकड़ों पर गौर करें तो देश में बेरोजगारी की स्थ‍िति में कोई सुधार होता नहीं दिख रहा। सितंबर से दिसंबर 2019 के चार महीनों में बेरोजगारी की दर 7.5 फीसदी तक पहुंच गई है। यही नहीं, उच्च श‍िक्ष‍ित लोगों की बेरोजगारी दर बढ़कर 60 फीसदी तक पहुंच गई है।

CMIE एक निजी थ‍िंक टैंक है, जिसके सर्वे और आंकड़ों को काफी विश्वसनीय माना जाता है।CMIE  के सर्वे के अनुसार, ग्रामीण भारत की तुलना में शहरी भारत में बेरोजगारी की दर ज्यादा है। शहरी भारत में इस दौरान बेरोजगारी की दर 9 फीसदी तक पहुंच गई। यानी शहरों में बेरोजगारी राष्ट्रीय औसत से भी ज्यादा है। ग्रामीण भारत में इस दौरान बेरोजगारी 6.8 फीसदी रही। यह हाल तब है जब कुल बेरोजगारी में करीब 66 फीसदी हिस्सा ग्रामीण भारत का होता है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि शहरों में खासकर उच्च श‍िक्ष‍ित युवाओं में बेरोजगारी की दर बहुत ज्यादा है।रिपोर्ट के अनुसार, ’20 से 24 साल के युवाओं में बेरोजगारी की दर 37 फीसदी है और इनमें से ग्रेजुएट्स में बेरोजगारी की दर 60 फीसदी तक पहुंच गई है।ग्रेजुएट्स में बेरोजगारी की औसत दर साल 2019 में 63.4 फीसदी तक पहुंच गई है।

इन आंकड़ों के बीच मधेपुरा के पूर्व सांसद और जन अधिकार पार्टी सुप्रीमों पप्पू यादव ने पिछले दिनों अपने ट्विटर हैंडल पर एक सर्वें किया था। जिसमें उन्होंने पूछा था कि ‘बेरोजगारी पर चर्चा से सबसे अधिक डर किसे लगता है?’ नरेंद्र मोदी को या नीतीश कुमार को।

उस सर्वें के अनुसार 86% लोग मानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बेरोजगारी पर चर्चा से डर लगता है। वहीं 14% लोगों का मानना है कि नीतीश कुमार बेरोजगारी पर चर्चा से डरते हैं।

बता दें कि इस सर्वें में 4438 लोगों ने हिस्सा लिया था।

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