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बड़ी खबर: CAA के खिलाफ प्रस्ताव, 24 देशों के सदस्यों ने ठहराया ‘विभाजनकारी’

डेस्क: संशोधित नागरिकता कानून (CAA ) को लेकर विपक्षी पार्टियां समेत कई संगठन देश भर में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके साथ-साथ केरल, पंजाब समेत कई राज्य इसके खिलाफ प्रस्ताव पास कर चुके हैं।

देश में मचे हंगामे के बीच अब यह मुद्दा यूरोपीय यूनियन की संसद तक पहुंच गया है। यूरोपीय संसद सीएए के खिलाफ पेश किए गए प्रस्ताव पर बहस और मतदान करेगी। संसद में इस सप्ताह की शुरुआत में यूरोपियन यूनाइटेड लेफ्ट/नॉर्डिक ग्रीन लेफ्ट (जीयूई/एनजीएल) समूह ने प्रस्ताव पेश किया था जिस पर बुधवार को बहस होगी और इसके एक दिन बाद मतदान होगा।

24 देशों के यूरोपीय संसद के 154 सदस्यीय सोशलिस्ट्स और डेमोक्रेट्स ग्रुप के सदस्यों द्वारा इस सप्ताह के शुरुआत में यह प्रस्ताव पेश किया है जिस पर अगले सप्ताह चर्चा होने की उम्मीद है।

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इसमें भारत से अपील की गई है कि सीएए के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ ‘रचनात्मक बातचीत’ हो और ‘भेदभावपूर्ण सीएए’ को निरस्त करने की उनकी मांग पर विचार किया जाए। प्रस्ताव में कहा गया है, ‘सीएए भारत में नागरिकता तय करने के तरीके में खतरनाक बदलाव करेगा। इससे नागरिकता विहीन लोगों के संबंध में बड़ा संकट विश्व में पैदा हो सकता है और यह बड़ी मानव पीड़ा का कारण बन सकता है।’

इस प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र के घोषणापत्र, मानव अधिकार की सार्वभौमिक घोषणा (यूडीएचआर) के अनुच्छेद 15 के अलावा 2015 में हस्ताक्षरित किए गए भारत-यूरोपीय संघ सामरिक भागीदारी संयुक्त कार्य योजना और मानव अधिकारों पर यूरोपीय संघ-भारत विषयक संवाद का जिक्र किया गया है।

बता दें कि CAA भारत में पिछले साल दिसंबर में लागू किया गया था जिसे लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। भारत सरकार का कहना है कि नया कानून किसी की नागरिकता नहीं छीनता है बल्कि इसे पड़ोसी देशों में उत्पीड़न का शिकार हुए अल्पसंख्यकों की रक्षा करने और उन्हें नागरिकता देने के लिए लाया गया है।