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इस बार 33.5 फीसदी पूर्वांचली वोटर केजरीवाल के इरादों पर फेरेंगे झाड़ू ?

डेस्क: दिल्ली विधानसभा चुनाव की सियासी जंग फतह करने के लिए सभी दल अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। सभी के अपने-अपने दावे और वादे हैं। ख़ास बात यह है कि इस बार बिहार के तीन प्रमुख सियासी दल भी अपना किस्मत आजमा रहे हैं। लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) बीजेपी के साथ तो राष्ट्रीय जनता दल (RJD ) कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। सभी दल की नज़र पूर्वांचली वोटरों पर हैं।

जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने आम आदमी पार्टी पर दिल्ली में रह रहे पूर्वांचलियों को ठगने का आरोप लगाया है। जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव और दिल्ली प्रभारी संजय झा ने अपने ब्लॉग में दावा किया है कि इस बार दिल्ली केजरीवाल के इरादों पर झाड़ू फेरेगी। उन्होंने कहा कि इस बार दिल्ली चुनाव का रुख पूर्वांचली मतदाता तय करेंगे। जेडीयू नेता ने कहा कि दिल्ली के ज्यादातर इलाकों में आधारभूत सुविधाओं की कमी है, पीने लायक पानी नहीं है, शहर दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार है और शिक्षा पर भी सिर्फ ढोल पीटा गया।

बिहार के जल संसाधन मंत्री ने कहा कि टूटे-फूटे रास्ते, बहता सीवर, कूड़े का ढेर ही संगम विहार, बुड़ारी, किरारी जैसे क्षेत्रों का अभिशाप है। वहीं अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के लिए मोदी सरकार की तारीफ की है। उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली के 1.46 करोड़ मतदताओं में 33.5 फीसदी पूर्वांचली हैं और यह कहने में कोई संकोच नहीं कि अरविंद केजरीवाल ने इस समुदाय को बहुत बुरी तरह से ठगा है। दिल्ली की असली लड़ाई उन 30 विधानसभाओं में फैली इस जनसंख्या के ही आशीर्वाद से जीती जाएगी।

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शिक्षा के मामले में केजरीवाल सरकार घरते हुए कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य के मसले पर केजरीवाल ढोल भले पीट लें, पूरे पेज के विज्ञापन भले दे लें, पर सच्चाई हम सभी जानते हैं। शिक्षा का हाल यह है कि दसवीं बोर्ड में खराब रिज़ल्ट के मामले में 13 वर्षों का रिकॉर्ड टूट गया है, 12वीं बोर्ड में बैठने वाले बच्चों की संख्या 5 साल में 50 हज़ार तक कम हो गयी है, नाकाम हुए बच्चों को स्कूली सिस्टम से ही निकाल दिया गया है। दो-तिहाई बच्चे मजबूरी में कला और वाणिज्य पढ़ रहे हैं, क्योंकि आधे से अधिक शिक्षकों के पद खाली हैं और सरकारी स्कूलों में डेढ़ लाख से अधिक नामांकन घट गए हैं। दो स्कूलों में स्वीमिंग पूल खोलकर और उनकी तस्वीरें यत्र-तत्र-सर्वत्र चिपकाकर केजरीवाल शायद वही कर रहे हैं कि कंकाल के ऊपर जड़ाऊ मखमल की पोशाक पहना दी है और उसकी प्रदर्शनी कर रहे हैं।