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आर्थिक तंगी से जूझ रहे मोदी सरकार लगा बड़ा झटका, RBI ने नोट छापने से किया इंकार

डेस्क: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI ) ने 4 से 6 फरवरी तक चली समीक्षा बैठक के बाद गुरुवार को मौजूदा वित्त वर्ष (2019-20) की छठी और अंतिम मौद्रिक नीति का ऐलान किया है। आरबीआई ने इस बार भी रेपो रेट में बदलाव नहीं किया। इसे 5.15% पर बरकरार रखा है। रेपो रेट के अलावा अन्य दरें भी स्थिर रखी हैं। रिवर्स रेपो रेट 4.90% पर बरकरार रखा है। दिसंबर की बैठक में भी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था। इससे पहले लगातार 5 बार कटौती करते हुए रेपो रेट में 1.35% कमी की थी। आरबीआई ने अगले वित्त वर्ष (2020-21) में जीडीपी ग्रोथ 6% रहने का अनुमान जारी किया है। चालू वित्त वर्ष (2019-20) में 5% ग्रोथ का पिछला अनुमान ही बरकरार रखा है।

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि इकोनॉमिक ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरों के अलावा दूसरे तरीके भी हैं। ग्रोथ बढ़ाने के लिए जब तक जरूरी होगा तब तक अकोमोडेटिव आउटलुक रखा जाएगा। पॉलिसी के एलान के बाद शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों निफ्टी और सेंसेक्स में उछाल देखने को मिल रहा है। बता दें आम लोगों के साथ शेयर बाजार और उद्योग की नजर आज आने वाली मौद्रिक नीति पर टिकी थीं।

आरबीआई ने मोदी सरकार को झटका देते हुए नई नॉट छापने से इंकार कर दिया है। दरअसल, RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि बढ़ते राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए केंद्रीय बैंक की अधिक नोट छापने की कोई योजना नहीं है।

बता दें कि बीते 1 फरवरी को आम बजट में सरकार ने राजकोषीय घाटे के अनुमान को बढ़ा दिया है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.8 फीसदी कर दिया है। जबकि पिछले बजट में इसके 3.3 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई थी।

बढ़ते राजकोषीय घाटे का असर वही होगा जो आपकी कमाई के मुकाबले खर्च बढ़ने पर होता है. खर्च बढ़ने की स्थिति में सरकार को कर्ज लेना पड़ता है। इस घाटे को कम करने के लिए सरकार भारतीय रिजर्व बैंक से उम्‍मीद कर रही थी।