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बिग ब्रेकिंग: प्रशांत किशोर ने अपने बड़े प्लान का किया ऐलान, एक करोड़ युवाओं की फ़ौज चुनेगी एक सशक्त नेता

डेस्क: चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने पटना में पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एक तरफ जहां नीतीश कुमार को अपना पिता तुल्य बताया है तो दूसरी तरफ उनके कथित विकास मॉडल पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मेरा और नीतीश जी का संबंध राजनीतिक नहीं था। वह मुझे अपना बेटा मानते थे। नीतीश जी के फैसले का मैं दिल से स्वागत करता हूं।

उन्होंने आगे कहा कि नीतीश जी उनके साथ हैं, जो गोडसे की विचारधारा को मानते हैं। गांधी और गोडसे एक साथ नहीं चल सकते हैं। पिछली सरकारों ने कुछ नहीं किया, इसलिए नीतीश जी को लगता है कि जो किया बहुत किया। लेकिन बिहार अभी भी सबसे पिछड़ा राज्य बना हुआ है।

प्रशांत किशोर ने कहा, ‘आपके झुकने से भी बिहार का विकास हो रहा है, तो मुझे आपत्ति नहीं है। क्या इस गठबंधन के साथ रहने से बिहार का विकास हो रहा है, सवाल यह है। लेकिन इतने समझौते के बाद भी बिहार में इतनी तरक्की हो गई है? क्या बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिला? हाथ जोड़ने के बाद भी पटना को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा नहीं मिला।’

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ‘मैं इसलिए नही बैठा हूं कि कोई राजनैतिक दल बना कर चुनाव लडूं। बिहार में मैं चुनाव लड़ने और लड़ाने के लिए नहीं आया हूं। मैं जबतक जिंदा हूं, तबतक मैं बिहार की सेवा करूंगा। प्रशांत किशोर ने आगे कहा, ‘मैं यहां किसी राजनीतिक पार्टी का ऐलान करने जा रहा हूं या किसी गठबंधन के काम में मेरी कोई दिलचस्पी नहीं है। मेरा परसों से कैंपेन शुरू होगा- बात बिहार की। मेरा लक्ष्य सिर्फ बिहार की तस्वीर बदलना है।’ उन्होंने कहा कि ‘इस यात्रा के दौरान अगले 100 दिन तक 1 करोड़ से अधिक ऐसे युवाओं से मिलेंगे जो बिहार में नए नेतृत्व पर यकीन रखते हों और बिहार को भारत के टॉप 10 राज्यों में देखना चाहते हों। बिहार एक सशक्त नेता चाहते हैं, जो बिहार की बात कहने के लिए किसी को पिछलग्गू न बने।’

JDU के पूर्व उपाध्यक्ष ने कहा कि नीतीश का विचार है कि हम पुरानी पार्टी है, ट्विटर का क्या करेंगे? मेरी सोच इससे अलग है। ट्विटर अकेले गुजरात वालों का नहीं है। गुजरात को ट्विटर हमने ही सिखाया है।’

बता दें कि इससे पहले सोमवार को उन्होंने कहा था, ‘हमने देश भर में भले ही राजनीतिक मैनेजर के तौर पर काम किया हो, लेकिन बिहार में मैंने एक पॉलिटिक्ल एक्टिविस्ट के तौर पर अपना सियासी सफर शुरू किया था। ऐसे में एक बात साफ तौर पर समझ लीजिए कि बिहार में मेरी भूमिका एक मैनेजर (रणनीतिकार) की नहीं होगी बल्कि एक राजनीतिक कार्यकर्ता के तौर पर ही होगी।