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देशद्रोह केस में मुकदमे की मंजूरी दिए जाने पर कन्हैया कुमार ने केजरीवाल सरकार को क्यों दिया धन्यवाद? पढ़ें रिपोर्ट

डेस्क: दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में लगे कथित देश विरोधी नारों के मामले में स्पेशल सेल को मुकदमा चलाए जाने की मंजूरी दिल्ली की केजरीवाल सरकार हर दे दी गई है। जिसके बाद अब जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार , उमर खालिद समेत 10 लोगों पर राजद्रोह का केस चलाये जाने का रास्ता साफ हो गया है।

बता दें कि पुलिस ने कन्हैया कुमार और जेएनयू के पूर्व छात्रों उमर खालिद तथा अनिर्बान भट्टाचार्य समेत अन्य लोगों के खिलाफ अदालत में 14 जनवरी को आरोपपत्र दाखिल किया और कहा था कि उन्होंने 9 फरवरी, 2016 को परिसर में एक समारोह में लगाये गये राजद्रोह के नारों का समर्थन किया और जुलूस निकाला था।

दिल्ली सरकार के इस फैसले पर राजनीति तेज हो गई है। कन्हैया ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा है, ‘दिल्ली सरकार को सेडिशन केस की परमिशन देने के लिए धन्यवाद। दिल्ली पुलिस और सरकारी वक़ीलों से आग्रह है कि इस केस को अब गंभीरता से लिया जाए, फॉस्ट ट्रैक कोर्ट में स्पीडी ट्रायल हो और TV वाली आपकी अदालत की जगह कानून की अदालत में न्याय सुनिश्चित किया जाए। सत्यमेव जयते।’

फिलहाल कन्हैया कुमार सीपीआई के नेता हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में कन्हैया कुमार ने बेगूसराय से सीपीआई के टिकट से लोकसभा चुनाव भी लड़ा था, लेकिन उनको बीजेपी के फायरब्रांड नेता गिरिराज सिंह के हाथों का हार का मुंह देखना पड़ा था।

एक अन्य आरोपी उमर ख़ालिद ने भी ट्वीट किया है। उमर ने लिखा है, ‘मेरे और अनिर्बान की तरफ से बयानः दिल्ली सरकार की तरफ से देशद्रोह केस में हमारे खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी से हमे कोई दिक्कत नहीं होगी। हमें भरोसा है कि हम निर्दोष हैं, हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और हम खुद इस मामले की कोर्ट में सुनवाई की मांग कर रहे थे।’

उन्होंने कहा, ‘कोर्ट में सुनवाई से साबित हो जाएगा कि सत्तारूढ़ सरकार की तरफ से कराया जा रहा मीडिया ट्रायल झूठा और राजनीतिक रूप से प्रेरित है। हम काफी समय से इन झूठे आरोपों के साए में जी रहे हैं। आखिरकार, सब दूध का दूध और पानी का पानी होगा। हम कोर्ट में अपना बचाव करेंगे, हम सत्तारूढ़ सरकार के झूठ और उनके राष्ट्रवादी होने के झूठे दावे की पोल खोलेंगे।’

9 फरवरी 2016 को जेएनयू में कथित तौर पर देश विरोधी नारे लगे थे। कहा गया था कि संसद भवन पर हमले का आरोपी अफजल गुरू और कश्मीर अलगाववादी नेता मकबूल भट्ट के समर्थन में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।

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