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दिल्ली हिंसा: विदेशों में भारत की छवि हुई खराब ! पीएम मोदी को भेजा न्योता रद्द करने की मांग

डेस्क: दिल्ली में नागरिकत संशोधन कानून(CAA) को लेकर बड़े पैमाने पर हुई हिंसा के ख़िलाफ़ बांग्लादेश की कई इस्लामिक पार्टियों पिछले तीन-चार दिन से देश भर में विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। ढाका में इस प्रदर्शन के दौरान इस्लामिक पार्टियों ने भारतीय प्रधानमंत्री मोदी को शेख मुजीबुर रहमान की सौवीं जयंती पर बुलाने के लिए भेजे गए आमंत्रण को रद्द करने की माँग की है।

ढाका ट्रिब्यून के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने धमकी दी है कि अगर सरकार ने पीएम मोदी को भेजा आमंत्रण वापस नहीं लिया तो भारतीय प्रधानमंत्री के आने पर ढाका एयरपोर्ट पर वे विरोध करेंगे।

बीबीसी हिंदी के एक रिपोर्ट के मुताबिक हिफ़ाजत-ए-इस्लाम के उपाध्यक्ष नूर हुसैन कासमी ने कहा है, ”बैठक के बाद अगले विरोध-प्रदर्शन की घोषणा की जाएगी।” वहीं एक और इस्लामिक पार्टी के नेता मौलाना मामुनल हक़ ने कहा है कि ‘अगर पीएम मोदी बंगबंधु की शताब्दी जयंती में आते हैं तो यह बांग्लादेश के राष्ट्रपिता का अपमान होगा।’

सुदूसरी तरफ बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी अवामी लीग के महासचिव और बांग्लादेश के सड़क परिवहन मंत्री ओबैदुल क़ादर ने कहा था कि ‘दिल्ली में हिंसा भारत का आंतरिक मामला है।’ ओबैदुल के बयान की इस्लामिक पार्टियों ने तीखी आलोचना की है।

इस्लामी ओइकया जोत के नेता मौलाना अब्दुल क़रीम ने कहा है कि, ”बीजेपी के लोगों ने मुसलमानों को घरों में घुसकर मारा है। मस्जिदों को अपवित्र किया है। दिल्ली में मुसलमानों के लिए बहुत ही मुश्किल स्थिति पैदा कर दी गई है। अगर मोदी ढाका आते हैं तो ठीक नहीं होग।”

गौरतलब है कि शेख मुजीबुर रहमान की सौवीं जयंती पर कई बड़े आयोजन मार्च के दूसरे हफ़्ते में शुरू हो रहे हैं। शेख मुजीब बंगबंधु या बंगाली राष्ट्र के पिता के रूप में जाना जाता है। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शताब्दी समरोह में आमंत्रित विशिष्ट अतिथियों में से हैं।

बता दें कि दिल्ली की हिंसा में मृतकों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 42 पहुंच गई। वहीं घायलों की संख्या 300 से ज्यादा हो गई है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दंगा प्रभावित कुछ इलाकों में दुकानें खुलने के साथ ही हालात सामान्य होते दिख रहे हैं।