बिहार राजनीती राज्य

नीतीश कुमार के विरोधी कार्यकर्ता और भीड़ में अंतर नहीं समझ पाते हैं !

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जन्मदिन के मौके पर रविवार को पटना के गांधी मैदान में पार्टी के तरफ से कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां तक नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर(NPR) का सवाल है तो वह 2010 के प्रारूप के आधार पर ही बनाया जाएगा। इस संबंध में बिहार विधानसभा में प्रस्ताव भी पारित किया गया है। नीतीश कुमार ने दावा किया कि वे इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों में एनडीए गठबंधन में रहकर ही चुनाव लड़ेंगे और गठबंधन को 200 से ज्यादा सीटें मिलेंगी।

माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जिनके नेतृत्व में एनडीए इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव लड़ेगी, ने अपने चुनावी अभियान की शुरुआत इस सभा के माध्यम से कर दी है। लेकिन सम्मेलन में भीड़ नदारद था। जिसके लेकर बिहार के विपक्षी दलों ने तंज कसना शुरू कर दिया है।

विपक्षी दलों के तंज पर JDU ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। जेडीयू ने कहा है कि आज गांधी मैदान में जदयू का कार्यकर्ता सम्मेलन था, रैली नहीं। पार्टी के आम सदस्य आमंत्रित नहीं थे इसमें.! फिर भी कुछ लोग जिनके ‘ज्ञान-चक्षु’ कुछ ज्यादा खुले हैं, इसकी सार्थकता को संख्या-बल से तौलने की हास्यास्पद कोशिश कर रहे हैं.! काश कि वे कार्यकर्ता और भीड़ में अंतर समझ पाते.!!

बता दें कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने तंज कसते हुए लिखा था, ‘मुख्यमंत्री नीतीश जी के जन्मदिन के शुभ उपलक्ष्य पर पटना के गाँधी मैदान में आयोजित महारैला सह महानुक्कड़ सभा सह महाकार्यकर्ता सम्मेलन की महासफलता पर महाबधाई। 200 सीट जीतने का दावा करने वाले सत्ताबल, धनबल,बाहुबल व अश्लील नाच-गाने के बावजूद प्रत्येक विधानसभा से 50 लोग भी नहीं ला पाए’।

वहीं मधेपुरा के पूर्व सांसद और जन अधिकार पार्टी के अध्यक्ष पापू यादव ने कार्यक्रम की तस्वीर शेयर करते हुए अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा है, ‘नीतीश जी जनता जाग चुकी है,आपका साथ छोड़ चुकी है।भीड़ की यह तादाद आपके लिए आईना है। आपके लिए संकेत है कि आप इस बार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीति से संन्यास का ऐलान कर अपनी इज़्ज़त बचा लें। अन्यथा,जो दुर्दशा 15वर्षों में आपने बिहार का किया है,उसकी सज़ा बिहार आपकी दुर्गति करके देगा।’