बिहार राज्य

LNMU में “सौर ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहन एवं ऊर्जा की बचत पर बल” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन हुआ

डेस्क: आज दिनांक 3 मार्च 2020 को विश्वविद्यालय सभागार में दिन के 11:00 बजे बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत “सौर ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहन एवं ऊर्जा की बचत पर बल” विषय पर ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति महोदय की अध्यक्षता में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय सेवा योजना के समन्वयक डॉ आनंद प्रकाश गुप्ता के स्वागत भाषण से किया गया। इस अवसर पर सर्वप्रथम LNMU के कुलपति, प्रति-कुलपति एवं कुलसचिव को पौधा भेंट किया गया। कुलपति महोदय ने संगोष्ठी के अध्यक्षीय भाषण की शुरुआत इस प्रश्न के साथ किया कि राज्य सरकार के द्वारा इस योजना अर्थात ‘जल जीवन हरियाली’, को लाने की जरूरत क्यों पड़ी? तत्पश्चात उन्होंने सभी को अपनी आदतों में बदलाव लाने की बात करते हुए कहा कि- साफ सफाई का ध्यान रखना, वृक्षारोपण को बढ़ावा देना, नदियों में कचरे ना फेंकना, ऊर्जा का दुरुपयोग न करना आदि को अपनी आदत में शामिल करके हम पर्यावरण को बचा सकते हैं। उन्होंने जल जीवन हरियाली योजना के उद्देश्य को सफल बनाने में सबको योगदान करने की गुजारिश की।

तत्पश्चात प्रति कुलपति महोदय ने सड़क किनारे वृक्षारोपण करने को ज्यादा उपयोगी बताया।सभी संस्थानों में वृक्षारोपण को बढ़ावा देना साथ ही यह सुनिश्चित करना कि वृक्षारोपण कहां करना चाहिए, यह अधिक महत्वपूर्ण है।उन्होंने कचरा प्रबंधन के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए साग्रह कहा कि घरों में जो कचरा निकलता है उससे खाद बनाया जा सकता है।अतः उसे बाग-बगीचे या मिट्टी में डाल देना चाहिए। इस प्रकार उनका कचरों का सफल रूप में लैंड डिस्पोजल हो सकेगा।

इसी क्रम में कुलसचिव महोदय ने सभा को संबोधित करते हुए साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया। उन्होंने कूड़े-कचरे को सही स्थान पर डालने को अपनी आदत में शामिल करने को कहा।तभी हमारा विश्वविद्यालय-परिसर तथा संपूर्ण दरभंगा नगर स्वच्छता के उद्देश्य को सार्थक कर पाएगा। संगोष्ठी में उपस्थित प्रथम संसाधन पुरुष प्रो॰ संतोष कुमार (अध्यक्ष, भूगोल विभाग) ने जल जीवन हरियाली योजना के उद्देश्य को सभा के समक्ष प्रस्तुत करते हुए महात्मा गांधी जी के विचारों व प्रयासों का उल्लेख किया और सौर ऊर्जा के महत्व को उजागर किया। उन्होंने जल और हरियाली का हमारे जीवन के लिए महत्ता, वृक्षों का कटाव और जल प्रदूषण के कुप्रभावों पर विशेष प्रकाश डाला।

इसी के साथ द्वितीय संसाधन पुरुष डाॅ॰ अनुरंजन( भूगोल विभाग) ने यह कहा कि भारत की भौगोलिक स्थिति पृथ्वी के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में है और ऐसे में यहां सौर ऊर्जा की असीम संभावनाएं हैं।सौर ऊर्जा के विकल्पों को तलाश कर, उनको अपने प्रयोग में लाना और उस प्रयोग को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है। यह जल जीवन हरियाली योजना के उद्देश्य की पूर्ति में सहायक हो सकेगा।

इस कार्यक्रम में मानविकी संकायाध्यक्ष डॉ॰ प्रीति झा, राजनीति विज्ञान के अध्यक्ष प्रोफेसर जितेंद्र नारायण सिंह, संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रोफेसर जीवानंद झा, विकास पदाधिकारी प्रोफेसर के.के. साहू, अंग्रेजी विभागाध्यक्ष ए.के. बच्चन, उप कुलसचिव डॉ॰ राजीव कुमार, परीक्षा नियंत्रक प्रथम- डॉ॰ उमेश कुमार दास, खेल पदाधिकारी अजय नाथ झा, समन्वयक महाविद्यालय विकास परिषद् डॉ॰ उमेश कुमार, एनएसएस समन्वयक डॉ॰ विनोद बैठा, डब्ल्यू॰ आई॰ टी॰ की कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ॰रश्मि कुमारी सहित सभी विभागों के अध्यक्ष, शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। इस संगोष्ठी का संचालन एनएसएस समन्वयक डॉ॰ आनंद प्रकाश गुप्ता ने और धन्यवाद ज्ञापन विकास पदाधिकारी प्रोफ़ेसर के. के. साहू ने किया।

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