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बड़ी खबर: दिल्ली हिंसा दो समुदायों का टकराव नहीं है,BJP के संरक्षण में मुसलमानों का क़त्लेआम हैः ब्रिटिश सांसद

डेस्क: नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर राजधानी दिल्ली में तीन दिनों तक हुई हिंसा को लेकर वैश्विक स्तर पर भारत की किरकिरी हो रही है। दिल्ली हिंसा की गूंज अब ब्रिटेन की संसद में भी सुनाई दे रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मंगलवार को को विपक्षी लेबर पार्टी, कन्जर्वेटिव पार्टी, लिबरल डेमोक्रेट्स और भारतीय मूल के कई सांसदों ने एक सुर में दिल्ली में हाल में हुई हिंसा और नागरिकता कानून को लेकर भारत सरकार की जमकर आलोचना की और ब्रिटेन सरकार से इसपर कड़ी कार्रवाई करने की अपील की है।

हाउस ऑफ कॉमन्स में लेबर पार्टी की सांसद नादिया व्हिटोम ने दिल्ली हिंसा को हिंदुओं द्वारा मुसलमानों का क़त्लेआम करार देते हुए भारत की मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि इसे दंगा या दो समुदायों के बीच टकराव नहीं कहा जाना चाहिए। ये मुस्लिम और कई अल्पसंख्यक समुदायों पर जारी हिंदुत्ववादी हिंसा का एक सिलसिला है, जो भारत में मोदी की बीजेपी सरकार ने मंज़ूरी दी है।

वहीं ब्रिटिश सिख लेबर पार्टी के सांसद तनमनजीत सिंह ढेसी ने दिल्ली हिंसा को 1984 के सिख विरोधी दंगों जैसा बताया। उन्होंने सदन में कहा कि दिल्ली की हिंसा ने 1984 के सिख विरोधी दंगों की दुखद यादों को ताज़ा कर दिया है, जब वह भारत में पढ़ रहे थे और उनकी साथी सांसद प्रीत कौर गिल ने भी 1984 दंगों का संदर्भ दिया।

इसके साथ ही लिबरल डेमोक्रेट सांसद एलिस्टेयर कारमाइक ने कहा कि सीएए और दिल्ली हिंसा अगल करके नहीं देखना चाहिए। भारत में ऐसे हालात असम में एनआरसी लाने और कश्मीर में मोदी सरकार की कार्रवाई के बाद बने हैं। ये भारत में मुसलमानों को हाशिए पर रखने के लिए डिज़ाइन किया गया मालूम पड़ता है।

दूसरी तरफ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने संशोधित नागरिकता कानून (CAA) पर सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर की है।अपने आवेदन में UNHRC ने कहा है कि ‘अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था ‘सीएए’ की आलोचना करती है। सीएए का कहना है कि मुस्लिम प्रवासियों को जोखिम में डालता है।’ कहा गया है कि, सीएए के औचित्य और निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। कानून के तहत सभी को समानता दिये जाने की कसौटी पर भी सीएए एक बड़ा सवाल ह।’ UNHRC द्वारा दाखिल 12 पन्ने के आवेदन में कहा गया है कि ‘ CAA भारत के व्यापक मानवाधिकार दायित्वों और अंतरराष्ट्रीय के वचनों के प्रति प्रतिबद्धता पर सवाल उठाता है।’

गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन कानून(CAA) को लेकर फैली हिंसा की चपेट में आने से अब तक 46 लोगों की मौत हो चुकी है। हिंसा में घयाल कई लोगों का अभी भी इलाज चल रहा है। इसमें गुरु तेग बहादुर हॉस्पिटल में 38, लोक नायक हॉस्पिटल में 3, जग परवेश चंदर हॉस्पिटल में एक और डॉक्टर राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल में चार लोगों की मौत हुई है। हिंसा के बाद से कई लोग लापता हैं। दिल्ली पुलिस गुमशुदा लोगों की तलाश में जुटी है। इस हिंसा में दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल रतनलाल और खुफिया विभाग के कर्मचारी अंकित शर्माकी भी मौत हो गई थी।

Desk
Social Activist
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