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बिना छुट्टी लिए 24 घंटे परिश्रम का परिणाम है यस बैंक संकट: पप्पू यादव

डेस्क:: लंबे समय से नकदी संकट से जूझ रहे यस बैंक पर गुरुवार को रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की ओर से कुछ नियम लागू कर दिए गए हैं। जिसके बाद यस बैंक के ग्राहकों का संकट बढ़ गया है। RBI ने इस बैंक के निदेशक मंडल को भंग करते हुए प्रशासक नियुक्त कर दिया है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी प्रशांत कुमार को यस बैंक का प्रशासक नियुक्त किया गया है।

विपक्षी दल के तमाम नेता इसको लेकर चिंता जाहिर कर रहे हैं और बीजेपी नित केंद्र सरकार को आड़े हाथ ले रहे हैं। मधेपुरा के पूर्व सांसद और जन अधिकार पार्टी(लो) के अध्यक्ष पप्पू यादव ने मोदी सरकार कर बीजेपी पर तंज कसा है। उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा है, ‘Yes Bank बना Noबैंक। यस को नो बनाना आसान नहीं, इसमें बहुत मेहनत है। हां कह, कोई ऐसे न नहीं कहता। ऐसे ही कोई बेवफा नहीं होता। राज गहरा है।जेटली जी रहे नहीं, बताएगा कौन? बिना छुट्टी 24घंटे परिश्रम का है यह परिणाम। नोटबंदी से आ’तंकी क्या, बैंकों की भी कमर टूट गयी काला धन क्या,सबकी लूटी कमाई।

एक अन्य ट्वीट में पूर्व सांसद ने लिखा है, ‘यस बैंक भी डूब गया।कोई फिक्र नहीं,भले अपना ही रुपया महज़ 50 हज़ार ही निकाल सकते हैं। पर मोदी है तो मुमकिन है मंत्र का जाप करें दर्द का अहसास ही नहीं होगा। नफ’रत की खेती लहलहा रही है तो फिर चिंता क्यों करें! पॉलिटिक्स जिन्दाबाद! हि’न्दू-मु’स्लिम को लड़ाते रहें,चुनावी फसल काटते रहें।

शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, ‘मैं भरोसा दिलाना चाहती हूं कि यस बैंक के हर जमाकर्ता का धन सुरक्षित है। रिज़र्व बैंक ने मुझे भरोसा दिलाया है कि यस बैंक के किसी भी ग्राहक को कोई नुक़सान नहीं होगा।’

बता दें कि RBI ने गुरुवार को बैंक के जमाकर्ताओं पर निकासी की सीमा सहित इस बैंक के कारोबार पर कई तरह की पाबंदियां भी लगा दीं। केंद्रीय बैंक ने अगले आदेश तक बैंक के ग्राहकों के लिए निकासी की सीमा 50,000 रुपये तय कर दी है। बता दें कि बैंक नकदी संकट से जूझ रहा है। अब इस बैंक के ग्राहक अगले एक महीने में 50 हजार रुपये से ज्यादा अपने खाते से नहीं निकाल पाएंगे। साथ ही यदि किसी खाताधारक ने बैंक से कर्ज ले रखा है या उस पर बैंक की कोई देनदारी है तो उस राशि को घटाने के बाद ही डिपॉजिट में से पैसे दिए जाएंगे। यह आदेश 5 मार्च 2020 को शाम 6 बजे से प्रभावी हो गया है और फिलहाल के लिए 3 अप्रैल 2020 तक प्रभावी रहेगा।

 

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