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ILFS, दीवान, PMC के बाद अब बैंक यस बैंक का निकला दिवाला, ऐसे में सबसे बड़ा सवाल-क्या हमारा बचत बैंक में सुरक्षित है ?

डेस्क: लंबे समय से नकदी संकट से जूझ रहे यस बैंक पर अब रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की ओर से कुछ नियम लागू कर दिए गए हैं। जिसके बाद यस बैंक के ग्राहकों का संकट बढ़ गया है। RBI ने इस बैंक के निदेशक मंडल को भंग करते हुए प्रशासक नियुक्त कर दिया है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी प्रशांत कुमार को यस बैंक का प्रशासक नियुक्त किया गया है।

इसके साथ ही RBI ने गुरुवार को बैंक के जमाकर्ताओं पर निकासी की सीमा सहित इस बैंक के कारोबार पर कई तरह की पाबंदियां भी लगा दीं। केंद्रीय बैंक ने अगले आदेश तक बैंक के ग्राहकों के लिए निकासी की सीमा 50,000 रुपये तय कर दी है। बता दें कि बैंक नकदी संकट से जूझ रहा है।

अब इस बैंक के ग्राहक अगले एक महीने में 50 हजार रुपये से ज्यादा अपने खाते से नहीं निकाल पाएंगे। यह आदेश 5 मार्च 2020 को शाम 6 बजे से प्रभावी हो गया है और फिलहाल के लिए 3 अप्रैल 2020 तक प्रभावी रहेगा। बैंक का नियंत्रण भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व में वित्तीय संस्थानों के एक समूह के हाथ में देने की तैयारी की गई है।

विपक्षी दल के तमाम नेता इसको लेकर चिंता जाहिर कर रहे हैं और बीजेपी नित केंद्र सरकार को आड़े हाथ ले रहे हैं। AIMIM प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इसी मसले पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि पहले PMC बैंक गया और अब कमर्शियल बैंक भी इस हालत में है।

असदुद्दीन ओवैसी ने अपने ट्विटर हैंडल लिखा, ‘पहले ILFS, दीवान जैसे नॉन बैंक थे जो कि गिरती अर्थव्यवस्था के चपेट में आए। फिर पीएमसी जैसा एक बड़ा कॉर्पोरेटिव बैंक इसकी चपेट में आ गया। और अब यस बैंक जैसा पहला कर्मिशियल बैंक फेल हो गया है।’ अब असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल पूछा कि क्या हमारी बचत बैंक में सुरक्षित है?

बता दें कि इससे करीब छह माह पहले रिजर्व बैंक ने बड़ा घोटाला सामने आने के बाद पीएमसी बैंक के मामले में भी इसी तरह का कदम उठाया गया था।

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