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पीएम मोदी का सम्मान ठुकराने वाली ये ‘बहादुर’ लड़की कौन है? जानिए सबकुछ

डेस्क:  ‘डियर पीएम, कृपया मेरे सम्मान पर जश्न ना मनाएं, यदि आप मेरी आवाज नहीं सुनने जा रहे हैं। ‘शी इंस्पायर्स अस’ के तहत मुझे उन लड़कियों और महिलाओं में से एक के रूप में चुनने के लिए शुक्रिया जो प्रेरित करती हैं। मैंने कई बार सोचा लेकिन फिर इस सम्मान को नहीं लेने का फैसला किया। जय हिंद।’

उक्त बातें 8 साल की पर्यावरण कार्यकर्ता लिसिप्रिया कंगुजम ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखी है। लिसिप्रिया भारत के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर से ताल्लुक रखती हैं और पर्यावरण के मुद्दे पर काफ़ी सक्रिय हैं। उन्हें साल 2019 में अंतरराष्ट्रीय बाल शांति पुरस्कार से नवाज़ा गया था।

भारत सरकार ट्विटर पर 8 मार्च, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मद्देनज़र कुछ ऐसी भारतीय महिलाओं के नामों का ज़िक्र कर रही है जो अलग-अलग मुद्दों पर सराहनीय और बेहतरीन काम कर रही हैं। और दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है।

इसी क्रम में 6 मार्च को @mygovindia से ट्वीट किया गया था, “लिसिप्रिया एक पर्यावरण कार्यकर्ता हैं। साल 2019 में उन्हें डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम चिल्ड्रेन अवॉर्ड, विश्व बाल शांति पुरस्कार और भारत शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. क्या आप उन जैसी किसी को जानते हैं? #SheInspiresUs हैशटैग के साथ हमें बताइए।’

भारत सरकार के इस ट्वीट के जवाब में लिसिप्रिया ने पीएम मोदी को टैग करते हुए धन्यवाद तो कहा लेकिन यह सम्मान स्वीकार करने से इनकार कर दिया। जो कि ऊपर लिखा है।

वो यहीं रुकीं बल्कि उन्होंने एक अन्य ट्वीट में राजनीतिक पार्टियों पर निशाना साधते हुए लिखा, ‘उन्होंने लिखा, “प्रिय नेताओं और राजनीतिक पार्टियों, मुझे इसके लिए तारीफ़ नहीं चाहिए। इसके बजाय अपने सांसदों से कहिए कि मौजूदा संसद सत्र में मेरी आवाज़ उठाएं। मुझे अपने राजनीतिक लक्ष्य और प्रोपेगैंडा साधने के लिए कभी इस्तेमाल मत कीजिएगा. मैं आपके पक्ष में नहीं हूं।’

लिसिप्रिया ने #ClimateCrisis हैशटैग के साथ एक अन्य ट्वीट में लिखा, ‘आपके सांसद न सिर्फ़ गूंगे बल्कि बहरे और अंधे भी हैं। ये पूरी असफलता है। अभी कार्रवाई कीजिए।’

बता दें कि लिसिप्रिया काफी समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सासंदों से जलवायु परिवर्तन क़ानून बनाए जाने की मांग कर रही हैं। पिछले साल जून महीने में लिसीप्रिया ने संसद भवन के बाहर खड़े होकर भी प्रदर्शन किया था। उनकी मांग थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत में जलवायु परिवर्तन कानून लागू करें। प्रदर्शन के दौरान उनके हाथ में एक तख्ती थी, जिसपर लिखा था ‘डियरमोदी जलवायु परिवर्तन पर कानून बनाकर हमारा भविष्य बचाएं’।

बताते चलें कि 2019 में लिसिप्रिया यूनडीपी में ग्रेटा थनबर्ग और जेमी मार्गोलीन के साथ पर्यावरण एक्टिविस्ट के तौर पर चुना गया। इन तीनों का परिचय क्लाइमेट चेंज के खिलाफ लड़ने वाली एक्टिविस्ट के तौर पर कराया गया।

लिसिप्रिया की तुलना अक्सर स्वीडिश पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग से की जाती है। हालांकि लिसिप्रिया को ये तुलना नहीं पसंद है। वो ज़ोर देकर कहती हैं कि उनकी अपनी पहचान है।

बता दें कि लिकीप्रिया के ट्विटर अकाउंट पर लिखा गया है कि इसे वह नहीं बल्कि उनके गार्जियन मैनेज करते हैं।

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