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कांग्रेस को गांधी परिवार से मुक्त करने का इससे अच्छा समय फिर कभी नहीं आएगा ! जानिए क्यों?

डेस्क: नारीवाद, सवर्ण, बहुजन, समाजवादी, पर्यावरण, साहित्य, से’क्स, खेल और आर्थिक मामलों के जानकार आदरणीय पंकज के चौधरी की कलम से:

जब किसी परिवार की जेबी पार्टी के पास कम से कम दो सौ सांसद हों तो उस परिवार की जेबी पार्टी को राज्यसभा में अच्छा वक्ता चाहिए होता है। ऐसे सांसदों द्वारा राज्य सभा में दिए गए ओजस्वी भाषणों से परिवार मजबूत होता है, उसके अभामंडल का विस्तार होता है (राजनीति से देश और समाज मजबूत होना तो कब का बंद हो चुका है)।

मगर किसी परिवार की जेबी पार्टी के पास चालीस-पचास सांसद ही हों तो उसे अच्छा वक्ता नहीं चाहिए. सारा मीडिया फूटेज उसे ही मिलेगा। और एक दिन ऐसा आएगा कि वो तेजतर्रार सांसद युवराज और राजकुमारी, जिसके लिए अपना बंगला बचाने के लिए सांसद बनना जरुरी है, के लिए खतरा बन जाएगा।

परिवार के लिए थरूर खतरा नहीं बनेगा। क्यूंकि थरूर साउथ इंडियन है। हिंदी ठीक से नहीं बोल पाता है। परिवार के लिए खतरा वैसा नेता भी नहीं बनेगा जो हिंदी पट्टी का है मगर सिर्फ हिंदी बोलना जानता है। परिवार के लिए वो खतरा बनेगा जो हिंदी पट्टी का हो, अच्छी हिंदी बोलता हो, अच्छी अंग्रेजी भी बोलता हो। बिजनेस हाउस भी उसे पसंद करते हों।

एक असुरक्षित परिवार के हाथों में कांग्रेस पार्टी का होना देश के लिए ठीक नहीं है। डर से ये परिवार मातोश्री के अंदर भी पहुँच जाता है। कांग्रेस को गांधी परिवार से मुक्त करने का इससे अच्छा समय फिर कभी नहीं आएगा।

अब सवाल ये उठता है कि अस्तित्व बचाने की लड़ाई तो राजद भी लड़ रही है। फिर उसने क्यों मनोज झा को राज्य सभा भेजने का फैसला किया?

जवाब ये है कि मनोज झा है, मनोज यादव नहीं। मनोज महतो भी नहीं है। मनोज झाओं और शिवानंद तिवारिओं से नीतीश और लालू की राजनीति को कोई खतरा नहीं होता। उनके आभामंडल का विस्तार होता है।

पिछड़ों की राजनीति के लिए मनोज झा और शिवानंद तिवारी आइटम नंबर गाने वाली ममता कुलकर्णी है, जिसके कोई जाए तो ले आए, मेरी लाख दुआएं पाए सुनने के लिए वैसे लोग भी घातक फिल्म देखने चले जाते थे जिसे अमूमन एक्शन फ़िल्में देखना पसंद नहीं है।

आलेख: स्वतंत्र व्यंग्यकार एवं टिप्पणीकार पंकज के चौधरी के फेसबुक टाइमलाइन से

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