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Big News: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को रत्ती भर मोजर नहीं देते हैं बीजेपी के यह मंत्री ! जानिए क्या है माजरा

डेस्क: पिछले कुछ महीनों के घटनाक्रम पर गौर करें तो ऐसा लगता है कि बिहार सरकार में बीजेपी कोटे के मंत्री, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को गंभीरता से नहीं लेते हैं। चाहे मुजफ्फरपुर इलाके में दिमागी बुखार से डेढ़ सौ से अधिक बच्चों की मौ’त हो या पटना में जलजमाव, उनकी फजीहत के पीछे किसी न किसी ऐसे मंत्रालय की नाकामी रही है, जो बीजेपी कोटे में हैं।

शुक्रवार को कोरोना वायरस से निपटने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक हाई लेवल बैठक की थी। उस बैठक में फैसला लिया गया कि सार्वजनिक कार्यक्रम स्थगित रहेंगे। स्कूल-कॉलेजों को भी तत्काल आदेश से बंद कर दिया गया। खुद मुख्यमंत्री ने इस बैठक के बारे में ट्वीट किया।

लेकिन इसके विपरीत स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय शनिवार को दौरे पर निकले। वे स्वास्थ्य सेवाओं का निरीक्षण करने के बजाय पार्टी की बैठक मे दिखे.।और उन्होंने खुद ट्वीट किया कि रोहतास में कोर कमिटी की बैठक में भाग लेकर संगठनात्मक चर्चा करते हुए।’

स्वास्थ्य मंत्री के इस कदम की आलोचना शुरू हो गई। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा है, ‘ऐसा प्रतीत होता है कि नीतीश सरकार कोरोना के नाम पर भय का माहौल बना रही है।’  तेजस्वी ने अपने ट्वीट में लिखा है, ‘ऐसा प्रतीत होता है कि नीतीश सरकार कोरोना के नाम पर भय का माहौल बना रही है। हमारे प्रशिक्षण शिविर स्थल को कोरोना के नाम पर रद्द कर दिया गया। हमने ख़ुशी-ख़ुशी आदेश का पालन किया लेकिन स्वास्थ्य मंत्री सरकार की advisory की ख़ुद धज्जियाँ उड़ा रहे है। सरकार का ऐसा दोहरा रवैया क्यों?’

बिहार में अब तक 121 संदिग्ध मरीजों की पहचान हुई है। इनमें 26 मरीजों ने 14 दिनों की ऑब्जर्वेशन अवधि को पूरा कर लिया है, इसलिए इन पर से सर्विलांस हटा दिया गया है। वहीं, अन्य संदिग्ध मरीजों को होम सर्विलांस पर रखकर निगरानी की जा रही है। इन मरीजों को सार्वजनिक स्थलों पर जाने से मना किया जा रहा हैं।

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