बिहार राज्य शिक्षा

क्या आपको पता है ? ‘सुशासन बाबू’ के राज में बच्चों को 5 रुपये से भी कम में मिलता है पौष्टिक आहार !

डेस्क: कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को रोकने के लिए बिहार सरकार हर संभव प्रयास करती नज़र आ रही है। लेकिन इस प्रयास ने प्रदेश में मिड डे मील योजना की पोल खोल कर रख दी है। सोशल मीडिया पर एक लेटर वायरल हो रहा है। जो कि शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के द्वारा लेटर जारी किया गया है।

जिसमें सभी जिला पदाधिकारी व शिक्षा पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है सभी बच्चों को बैंक खाते में मिड डे मील का पैसा हस्तांतरित करने के लिए कहा है। यहां तक तो ठीक है, लेकिन जिस दर पर पैसा हस्तांतरित करने के लिए बोला गया  है, उसको लेकर सवाल उठा रहे हैं।

दरअसल, लेटर  के हिशाब से 1 से 5 तक के बच्चे को 4 रुपया 48 पैसा प्रतिदिन एवं 5 से 8 तक के बच्चे को खाने के लिये 7 रुपया 61 पैसा प्रतिदिन के हिसाब से दिया जायेगा।

लेटर को शेयर करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता राघवेंद्र रमण ने सवाल उठाया है कि ‘क्या  7.61 रुपये में बिहार में खाना उपलब्ध होता है ? क्या वो भी पोष्टिक आहार ! मेरा मानना है नही होता है, यदि नही होता है तो सरकार एमडीएम योजनाओं के नाम पर बेवकूफ बना रहा है और शिक्षकों को एमडीएम योजना में लूटने का आजादी देता है और अपना कमीशन गरीब और कुपोषित बच्चों के नाम पे लेता है। वो आगे लिखते हैं, ‘वर्तमान की सरकार के कहनी और कथनी में आकाश पताल का अंतर नजर आता है।’

बता दें कि कोरोना वायरस से बचाव के मद्देनजर सभी सरकारी व निजी स्कूल 31 मार्च तक बंद कर दिए गए हैं। बिहार सरकार ने स्कूलों की बंदी के दौरान भी सरकारी प्रारंभिक स्कूल के बच्चों को मिड डे मील का लाभ बंद नहीं करने का फैसला लिया था। वहीं मिड डे मील की राशि की गणना कर राशि सीधे संबंधित छात्र के खाते में 31 मार्च से पहले जमा करने का निर्देश जारी किया है।

Desk
Social Activist
https://khabarilaal.com