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सरकार अपने मनचाहे पत्रकारों और न्यायाधीशों को राज्यसभा क्यों भेजते हैं? जानिए…

डेस्क: बरसों पहले की बात है. सोशलिस्ट इंदिरा गांधी के राज ने एक अंबानी पैदा किया था. उसके बाद इंदिरा गांधी इस दुनिया से चली गई. उसके बाद अंबानी इस देश की सरकार से बड़ी संस्था हो गई.

अंबानी से पहले नेता कॉरपोरेट सेक्टर को अपनी जेब में रखते थे. अंबानी के बाद कॉरपोरेट सेक्टर ने नेताओं को अपनी जेब में रखना शुरू किया.

पत्रकार लोग जानते हैं कि कौन मंत्री किस कॉरपोरेट सेक्टर के लिए काम करता है. देश का बच्चा बच्चा जानता है कि प्रणब मुखर्जी रिलायंस के लिए काम करते थे.

अम्बानी के बाद प्राइवेटाइजेशन आया. उसके बाद डिसइन्वेस्टमेंट और अरुण शौरी आया. उसके बाद फ्री मार्केट लिबरल पत्रकार पैदा हुए. इंडियन एक्सप्रेस औऱ शेखर गुप्ता पैदा हुए.

इन फ्री मार्केट लिबरल पत्रकारों ने देश की सवर्ण, जातिवादी मिडिल क्लास को डिसइन्वेस्टमेंट और अरुण शौरी को पचाने की हिम्मत दी, और तर्क दिया.

अंबानी अपने दोनों बेटों को कह कर गए थे कि सरकारी ऑफिस में काम करने वाले चपरासी का भी सम्मान करो. वो तुम्हारे काम आएगा.

पेट्रोलियम मंत्रालय में काम करने वाले सेक्रेटरी का दिल इंडियन ऑयल के लिए धड़कता था/है. रिलायंस के लिए धड़कता था/है. इसके लिए उन्हें नकद इनाम भी मिलते होंगे. लेकिन इसके बावजूद अंबानी उन्हें पोस्ट रिटायरमेंट बेनिफिट क्यों देते आये हैं?

इसलिए, क्योंकि पैसों का लेनदेन कोई नहीं देखता है. पोस्ट रिटायरमेंट बेनिफिट सब देखता है. इससे बांकी आईएएस अफसर में संदेश जाता है कि मेरे काम आओगे तो इनाम मिलेगा.

अब सवाल ये है कि सरकार अपने मनचाहे पत्रकारों और न्यायाधीशों को राज्यसभा क्यों भेजते हैं?

वजह साफ है. इससे बांकी संपादकों और न्यायाधीशों को संदेश जाता है. और एक दूसरा फायदा ये होता है कि आमलोगों की नज़र में संस्था बदनाम होती है. उन्हें ये संदेश दिया जाता है कि अपनी औकात में रहो. सरकार के खिलाफ ज्यादा बोलो मत. हमारा कुछ नहीं बिगाड़ लोगे.

आलेख: स्वतंत्र टिप्पणीकार, स्तंभकार और व्यंग्यकार पंकज के चौधरी के फेसबुक टाइमलाइन से।