आभासी दुनिया देश

चिदंबरम जैसे ‘भ्रष्टाचारी’ और शेहला जैसी ‘पाकिस्तान परस्त’ लोग भी मोदी की प्रशंसा करने को मजबूर क्यों हैं ? जानिए…

डेस्क: मूर्खाधिपतियों को चैन नहीं है। पहले पूछ रहे थे कि मोदी कुछ कर क्यों नहीं रहा? अब बोल रहे हैं कि 21 दिन बहुत ज्यादा होते हैं। अब मैं बताता हूँ कि जब सरकार तेज़ी से एक्शन लेने में लगी थी और तुम्हें मीडिया ने कुछ बताया तक भी नहीं था, तब तुम्हारे नेता क्या कर रहे थे। वो 30 दिसंबर 2019 का दिन था जब चीन ने ‘एक प्रकार के न्यूमोनिया’ की बात स्वीकार की और 7 जनवरी 2020 को WHO को कोरोना के बारे में बताया। भारत सरकार कब एक्टिव हुई, इसका आपको आईडिया भी है? ठीक इसके अगले दिन। 8 जनवरी को स्वास्थ्य मंत्रालय की ‘टेक्निकल एक्सपर्ट ग्रुप’ की बैठक में मंथन हुआ।

भारत में कोरोना वायरस का पहला मामला ही 30 जनवरी को आया। यानी सरकार उसके 3 हफ्ते पहले से इस बारे में एक्शन लेने लगी थी। जब अचानक ऐसी कोई नई और बड़ी आपदा आती है, कुछ दिक्कतें होती हैं। लेकिन उन्हें आधार बना कर कोसना आपको महज कुछ लाइक्स दिला सकते हैं, उससे ज्यादा कुछ नहीं। सरकार ध्रुव राठी जैसों के कहना पर नहीं चलती, जो जनवरी-फ़रवरी में कोरोना को ‘मीडिया का हौव्वा’ बता कर कह रहा था कि चीन से बाहर रहें वालों को डरने की ज़रूरत नहीं है।

कुछ लोगों को इस बात से भी शिकायत है कि मध्य प्रदेश में भाजपा ने सरकार क्यों बना ली? अरे मूर्खेश्वर, जब सरकार जाती है तो तुम सब भारत का नक्शा शेयर करने लगते हो कि कैसे भगवा घट रहा है। जब सरकार बनती है तो तुम्हें दर्द उठने लगते है। फरवरी के पहले हफ्ते में ही भारत ने थाईलैंड और सिंगापुर से आने वाले पैसेंजरों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी थी और चीन यात्रा पर पाबंदी लगा दी थी। जनवरी के अंतिम सप्ताह में ही लोगों को एडवाइजरी जारी कर दी गई थी कि वो चीन की यात्रा न करें।

आधार को गाली देने वालो, आज यही ‘डायरेक्ट ट्रंसफर’ बिना किसी दलाली के सरकार की मदद को सीधा ग़रीबों के खाते तक पहुँचाएगा। सरकार ने सभी मेडिकल कर्मचारियों के लिए ₹50 लाख इन्शुरन्स कवर की घोषणा की है। 8.69 करोड़ किसानों के खाते में ‘सम्मान निधि’ वाली राशि डाल दी जाएगी। ‘उज्ज्वला योजना’ के तहत 8.3 करोड़ ग़रीब परिवारों को अगले 3 महीने तक फ्री एलपीजी मिलेगी। सभी महिलाओं के 20 करोड़ ‘जन-धन’ खातों में अगले 3 महीनों तक ₹500 डाला जाएगा। 3 करोड़ दिव्यांगों को ₹1000 दिए जाएँगे।

100 से कम कर्मचारियों वालों कंपनियों और ₹15000 की मासिक सैलरी वाले कर्मचारियों का अगले 3 महीने तक का EPF भुगतान सरकार करेगी। लेकिन, नासमझों को कुछ समझ नहीं आएगा। जिस रिलायंस और अम्बानी को तुम गाली देते हो, उसने देश का पहला ‘कोरोना वायरस डेडिकेटेड हॉस्पिटल’ बना कर तैयार कर दिया है। अमेरिका में 70,000 केस आने के बाद न्यूयॉर्क का प्रशासन पार्कों को बंद करने के बारे में सोच रहा है, यहाँ 21 दिनों का लॉकडाउन करने की हिम्मत इसी मोदी ने दिखाई है। लेकिन नहीं, हम तो गरियाने के लिए पैदा हुए हैं, बिना जाने-समझे गरियाते रहेंगे।

तुम्हारी PM ममता बनर्जी होती तो? उसने तो कहा था कि मोदी कोरो’ना लेकर आई है ताकि दंगों से ध्यान भटकाया जा सके। तुम्हारा PM अखिलेश यादव होता तो? उसकी पार्टी के नेता ने तो कहा था कि कोरोना वायरस भाजपा लेकर आई है। अगर तुम्हारा PM राहुल गाँधी होता तो? उसकी पार्टी के कमलनाथ ने तो कोरो’ना के ख़तरे को ही नकार दिया था। शुक्र मनाओ कि ऐसी स्थिति में गार्जियन की तरह नेतृत्व करने वाला आदमी गद्दी पर बैठा है, नहीं तो ला’शों की ढेर पर बैठा होता भारत। दक्षिण एशियाई देश पागल नहीं हैं कि वो मोदी से सीखने आ गए।

रही बात मास्क और सैनिटाइजर की, तो सरकार ने उसके लिए भी दाम तय कर दिए हैं। जब किसी चीज की खपत कई गुना बढ़ जाए अचानक से, तब उन कंपनियों को उत्पादन बढ़ाना पड़ता है। ऐसी 4-5 कंपनियों को सरकार ने ऐसा करने को कहा। वेंटिलेटर्स तक के उत्पादन में वृद्धि लाई गई। और हाँ, शाहीन बाग़ वालों को उखाड़ के फेंकना शाह के बाएँ हाथ का खेल था, ये उन्होंने दिखा ही दिया है। लेकिन बार-बार कहने के बावजूद दिल्ली में भाजपा की जीत नहीं हुई। आज वही लोग सरकार को सबसे ज्यादा गाली दे रहे।

कमिश्नर वर्षा जोशी ने ट्वीट कर के बताया कि केजरीवाल सरकार ने डॉक्टरों को 3 महीने से सैलरी नहीं दी है। लेकिन नहीं, जिम्मेदार तो मोदी है। राहुल गाँधी ने एक एक डॉक्टर का वीडियो ट्वीट कर दिया, जिसमें उसने कहा था कि मोदी ने मास्क नहीं दिए। बाद में डिलीट करना पड़ गया। आख़िर इतना ही बुरा है मोदी तो उस पर आरोप लगाने के लिए तुम्हें झूठ मैनुफ़ैक्चर क्यों करना पड़ रहा है? और हाँ, हर उस राज्य में भगवा फिर से लहराएगा, जहाँ-जहाँ से सत्ता गई है। तुम रोते रहोगे। ऐसे समय में किसी का मनोबल गिराने वाले नेगेटिव लोग यही तो हैं।

आज जब पी चिदंबरम जैसे भ्रष्टाचारी दुश्म’न और शेहला रशीद जैसी पाकिस्तान परस्त लोग भी मोदी की प्रशंसा करने को मजबूर हो गए हैं, देश के कुछ ख़ास लोगों के स्थान विशेष में खलबली मची हुई है, क्वारंटाइन के कीड़े काट रहे हैं। कुछ करने को है नहीं, बस बिना फैक्ट्स के ज्ञान पेलते रहो। एक बार भारत कोरो’ना वायरस से उबर जाए, अभी तो तुम्हें इकॉनमी को लेकर भी मोदी को गाली देना है, इसीलिए कुछ ज़ह’र बचा कर रखो। बाकी जहाँ मास्क और वेंटिलेटर की एकदम कोई कमी नहीं थी, वहाँ का हाल देख लो।

संसाधन कम हो और मैनेजमेंट सही हो, तो काम चल जाता है लेकिन संसाधन प्रचुर हो और प्रबंधन लोला हो, कॉन्ग्रेस को ही देख लो। संसाधन और प्रबंधन दोनों सही हों लेकिन इच्छाशक्ति की कमी हो तो इटली और अमेरिका का हश्र देख लो। बाकी कागज़ तो दिखाना ही होगा।

आलेख: युवा जर्नलिस्ट अनुपम के सिंह के फेसबुक वॉल से। लेख में व्यक्त किये गए विचा लेखक के निजी विचार हैं।