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कोरोना संकट पर बोले पूर्व उत्कृष्ट सांसद: धार्मिक संस्थानों के पास भारत के सालाना बजट से भी ज्यादा पैसा, वो किस काम की है ?

डेस्क: दुनिया भर के देशों में कहर बरपा रहा कोरोना वायरस तेजी से भारत में भी पांव पसार रहा है। गुरुवार को कोरोना के 88 नए मामले सामने आए हैं। इसी के साथ  कोरोनावायरस संक्रमितों की संख्या बढ़कर 694 हो गई है। इसमें से 18 लोगों की वायरस की वजह से जान चली गई जबकि 45 लोग अब तक ठीक हो चुके हैं।देश के अन्य राज्यों के साथ-साथ अब बिहार में भी इससे संक्रमित लोगों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। बिहार में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या अब बढ़कर 9 हो गई है।

कोरोना संकट पर बिहार के मधुबनी से पूर्व में सांसद रहे बीजेपी के वरिष्ठ नेता हुकुमदेव नारायण यादव ने प्रेस रिलीज जारी कर कहा है, ‘यादव ने कहा, ‘दुनिया का कोई भी देश इस समय कोरोना वायरस को लेकर किसी दूसरे देश की मदद नहीं कर पा रहा है. ऐसे हालात में भारत के नागरिकों को आत्मचिंतन करना चाहिए. सांसद, विधायक, सरकारी कर्मचारी और अधिकारी, व्यापारी, उद्योगपति सभी पेंशनभोगी त्याग नहीं कर सकते हैं। इसलिए देश के धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के पास जो अकूत संपत्ति है, उसको आम जनता के लिए दान देना चाहिए।’

उत्कृष्ट सांसद अवार्ड से सम्मानित बीजेपी के पूर्व सांसद हुकुमदेव नारायण यादव ने कहा कि ‘धार्मिक स्थानों के खजाने में भारत सरकार के सालाना बजट से भी ज्यादा पैसा है। इन धार्मिक स्थानों में जमा दौलत किस काम की है। इस समय राष्ट्र भयंकर संकट में है।राष्ट्र के नागरिक बचेंगे, तभी सभी कुछ बचेगा।ईश्वर की इच्छा और प्रेरणा से राष्ट्र के नागरिकों ने ही धार्मिक संस्थानों में दान देकर धन को संचित कोष में जमा किया था।’

यादव ने कहा है कि प्रथम किस्त में वे अपना एक माह का पूर्व सांसद वाली पेंशन देने की घोषणा करते हैं। भारत अपने आध्यात्मिक तेज के बल पर प्रधानमंत्री के नेतृत्व में इस दैहिक, दैविक और भौतिक ताप को सहन कर विश्वगुरु बनेगा।

इसके साथ ही उन्होंने नागरिकों से अनुरोध किया है कि इस संकट का मुकाबला संयम, अनुशासन और आध्यात्मिक शक्ति के द्वारा ही किया जा सकता है। नवरात्र में प्रधानमंत्री केवल नींबू और पानी पर ही रह कर अपना काम करते हैं। दुनिया के संपन्न और समृद्ध तथा विकसित राष्ट्र कोरोना से युद्ध में हार गए हैं. क्या भारत अपने त्याग, संयम, अनुशासन और आध्यात्मिक तेज से इसको जीतने में सफल नहीं हो सकता है? हम अपनी संतानों और भावी पीढ़ियों के लिए त्याग नहीं कर सकते हैं? राष्ट्रधर्म क्या कह रहा है? स्वयं लोग घोषणा करें और प्रधानमंत्री राहत कोष में स्वेच्छा से दान करें।