बिहार राज्य

नीतीश सरकार का बड़ा फैसला, बाहर से आनेवाले प्रवासी मजदूरों को बिहार में ‘No Entry’

डेस्क: लॉकडाउन के चलते दूसरे राज्यों में काम कर रहे बिहार के मजदूरों के सामने संकट खड़ा हो गया है। इन मजदूरों के पास काम नहीं है। ट्रेन और बस समेत सभी परिवहन सेवाएं बंद होने के बाद अब घर वापसी का भी कोई विकल्प नहीं बचा है, वहीं बंदी की वजह से खाने-पीने के लिए वे दूसरों पर निर्भर हैं। वो दाने-दाने को तरस रहे हैं। ऐसे में कई लोग पैदल ही गंतव्य की ओर निकल चुके हैं। कइयों को योगी सरकार द्वारा चलाई जा रही बसें बिहार बॉर्डर तक लाकर छोड़ दे रही है।

इस सबके बीच बिहार सरकार ने केंद्र सरकार से मांग की है कि बाहर से आने वाले लोगों के लिए अंतिम तारीख तय हो। इस बारे में बिहार के मुख्य सचिव ने रविवार को केंद्रीय गृह सचिव और दिल्ली के कैबिनेट सचिव से बातचीत की। वीडियो कांफ्रेंसिंग पर हुई इस बातचीत की जानकारी देते हुए गृह विभाग के अपर सचिव आमिर सुबहानी ने बताया कि यह जरूरी है कि सीमित संख्या में लोग आएं। इसके साथ ही बिहार के बाहर से आ रहे भारी संख्या में प्रवासी लोगों के लिए सरकार ने बिहार पुलिस को अलर्ट कर दिया है।

गृह विभाग के अपर सचिव आमिर सुबहानी ने बताया कि प्रवासी लोगों को हर हाल में बॉर्डर पर ही रोका जा रहा है और उनको फिलहाल घर जाने की इजाजत नहीं मिलेगी। आमिर सुबहानी ने बताया कि बॉर्डर पर बड़े-बड़े कैंप बनाये गये हैं साथ ही आनेवाले लोगों की भी लिस्ट बनाई जा रही है। उन्होंने बताया कि हर जिले में बाहर से आने वाले 3 से 5 हज़ार लोगों की सूची बनाई जा रही है. बिहार में झारखण्ड और बंगाल से भी कुछ लोग आ रहे हैं।

इसके अलावा बिहार सरकार के अधिकारियों की दिल्ली सरकार के अधिकारियों से बातचीत की है। वहीं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार द्वारा जिलों के बॉर्डर पर 3 से 5 हज़ार लोगों के लिए कैंप खोल दिया गया है। इसका नाम ‘आपदा सीमा राहत शिविर’ दिया गया हैै। बाहर से आने वाले लीगों के रहने और खाने और इलाज का प्रबंध वहीं पर किया जा रहा है।

बता दें कि देश और दुनिया के साथ बिहार में भी कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। रविवार की सुबह तक बिहार में पॉजिटिव लोगों की संख्या 11 हो गई है। कोरोना का नया मरीज बिहार की राजधानी पटना में ही पाया गया है जो कि लखीसराय की रहने वाली एक 30 साल की महिला हैं।