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दीप के साथ लोगों ने जला’ए पटा’खे, तो बोले पत्रकार- आज एक बार फिर हम लोगों ने साबित किया कि हम जा’हिल हैं !

डेस्क: आज एक बार फिर हम लोगों ने साबित कर दिया कि हम जाहि’ल हैं, बुरा लगेगा लेकिन हमने आज एक बार फिर अपने जाहि’लपन को साबित किया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपील की थी की देशवासियों को एकजुटता दिखाने के लिए और रोशनी की ताकत दिखाने का ये अवसर है। लेकिन ज्यादातर लोगों ने इसको दीपावली का उत्सव ही मान लिया। खूब जमकर आति’शबाजी की। पटा’खे फो’ड़े गए…इन पटाखों की गूंज को सुनकर हमारे घर के बच्चों ने भी जिद करनी शुरू कर दी की हमें भी पटा’खे फोड़’ना है। मैं पूछता हूं कि क्या ये उत्सव मनाने का अवसर था? आज देश में हजारों लोग कोरोना से संक्रमित हैं, अभी तो कोरोना की जांच करने का हमारे पास पर्याप्त मात्रा में संसाधन उपलब्ध नहीं है नहीं तो ये आंकड़ा कहां चला जाएगा ये किसी को मालूम नहीं लेकेिन हमें तो उत्सव मनाने का अवसर चाहिए..

कौन कहता है कि तबलीगी जमात के लोग ही जाहिल है, आज जिन लोगों ने आति’शबाजी की, पटाखे फोड़े वे सभी लोग निहायत ही जाहिल है। माननीय प्रधानमंत्र नरेंद्र मोदी जी कहते कुछ हैं और उनके कहने का तात्पर्य हम लोग अति उत्साह में आकर कुछ और ही निकाल लेते हैं। प्रधानमंत्री जी ने ये कहा था कि कोरोना के खिलाफ इस जंग में हमें देशवासियों की एकजुटता को दिखाना था लेकिन कुछ लोगों ने इसको दीपावली समझ लिया।

काहे की दीपावली है भाई? अपने देश के बहुत सारे लोग अन्न के दानों के लिए तरश रहे हैं, बहुत सारे लोग देश के अलग-अलग हिस्सों में फंसे हुए हैं और दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज हैं। प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों की सैलरी नहीं मिल पाई है। सब्जी में डालने के लिए तेल नहीं, नमक नहीं…फिर किस बात की दीपावली? जमात की सोच को सहमति देने वाले जो लोग हैं वो किसी भी धर्म के हो सकते हैं, जिन लोगों ने आज राषट्रीय एकजुटता दिखाने के इस अवसर को दीपावली के उत्सव के तौर पर मनाया है वे सभी लोग धिक्कार के पात्र हैं। अगर आपको ये एहसास नहीं है कि ये वक्त राष्ट्रीय संकट का है और ये उल्लास या उत्सव मनाने का नहीं है तो फिर आपको कोई समझा नहीं सकता है।

नोट: आज मैंने प्रधानमंत्री की अपील पर अपने घर के तमाम लाइट को बंद किया और बालकनी में सपरिवार कैंडल और दिया जलाया है लेकिन दीपावली नहीं मनाया क्योंकि ये उत्सव का नहीं संकट का समय है, एकजुटता दिखाना था, इसको धा’र्मिक रंग नहीं देना था।

आलेख: युवा जर्नलिस्ट पंकज प्रसून जी फेसबुक वॉल से