बिहार राज्य

विश्लेषण: सत्य यह है कि नीतीश कुमार कोरोना जैसी आप’दाओं को संभालने के काबिल ही नहीं हैं !

डेस्क: सत्य यह है की नीतीश कुमार ऐसे आप’दाओं को संभालने के काबिल ही नहीं हैं। वो बाढ़ या चमकी नहीं संभाल पाते हैं, कोरोना तो एक वैश्विक महामारी है। बिहार सरकार के मंत्री झूठी तसल्ली देना चाहते हैं कि बिहार में कोरोना के कन्फर्म्ड केसेज की संख्या देश के अनुपात में कम है। जबकि सत्य यह है की बिहार में टेस्ट्स की संख्या ही बेहद कम है।

पूरे भारत में जहां सरकारी और प्राइवेट मिलाकर करीब 190 COVID टेस्ट सेंटर्स हैं, बिहार में अबतक सिर्फ 3 जगहों पर टेस्ट्स हो रहे हैं। चौंथा पीएमसीएच अब शुरू ही होने वाला है और उसकी क्षमता दोनों शिफ्ट मिलाकर करीब 80 टेस्ट पर डे होगी। महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, हरियाणा, दिल्ली जैसे राज्यों में जहां करीब आधे दर्जन से अधिक प्राइवेट लेबोरेट्रीज टेस्ट्स कर रही हैं वहीं बिहार में COVID टेस्ट करने वाली प्राइवेट लेबोरेट्रीज अबतक एक भी शुरू ही नहीं हुई है।

पूरे भारत में अबतक करीब 1 लाख से अधिक टेस्ट हो चुका है वहीं भारत की आबादी के करीब दसवें हिस्से वाले राज्य बिहार में अबतक सिर्फ साढ़े 3 हजार के करीब टेस्ट्स हुए हैं। बिहार का ‘एवरेज ऑफ टेस्ट पर मिलियन’ नेशनल एवरेज ऑफ टेस्ट पर मिलियन के करीब तिहाई से भी कम है। एक दिन में राज्य अभी करीब 500 टेस्ट ही कर पा रहा है।

सत्य ये है की बिहार सरकार शुतुरमुर्ग की तरह मुंह बालू में ढूकाए हुए बैठी है। बिल्कुल उसी तरह जैसे बाढ़ से पहले बैठी रहती है, बिल्कुल उसी तरह जैसे चमकी के तैयारी पर झूठ बोलती है। असलियत ये है की बिहार सरकार नका’रेपन, लापरवाही और असमर्थता के बंडल पर बैठी हुई है। न इनके पास कोई तैयारी है, न तरीका और न एफिशिएंट फंक्शन। वास्तव में इन्हें इसका अंदाजा ही नहीं है की ये बीमारी असलियत में कितनी बड़ी और ख़त’रनाक है। स्वास्थ्य मंत्रालय संभाल रहा मंत्री अपने पार्टी के स्थापना दिवस और दैनिंदनी कार्यक्रम में व्यस्त रहता है। स्वास्थ्य मंत्रालय के वेबसाइट पर COVID संबन्धित कोई अपडेट तक नहीं है।

हेल्थ मिनिस्ट्री का प्रिंसिपल सेक्रेटरी मीडिया में आकर कहते हैं की PPE किट की कमी है, हमने सेंटर से रिक्वेस्ट किया है। अबतक देशभर में दर्जनों प्राइवेट एजेंसियां विभिन्न राज्य सरकारों के साथ काम कर रही है, बिहार सरकार अबतक इस संदर्भ में अपने तरफ़ से कोई प्रयास कर ही नहीं पा रही है। सिर्फ केंद्र की तरफ़ मुंह बाए खड़ी है। बिल्कुल उसी तरह जैसे बाढ़ आने के बाद राहत पैकेज के लिए केंद्र की तरफ़ आंख चियार के देखने लगती है।

बिहार को तत्काल जरूरत है की गया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, मुंगेर जैसे जगहों पर सरकारी टेस्ट सेंटर्स की शुरुआत हो, इसके अलावे कम से कम आधा दर्जन प्राइवेट लेबोरेट्रीज शामिल किए जाएं। ताकि बिहार नेशनल एवरेज ऑफ टेस्ट पर मिलियन के आसपास भी कम से कम पहुंच पाए। नीतीश जी, जाग जाइए… ऑप्टिमल टेस्ट ही उपाय है हुजूर। नहीं तो इसी गति से चलते रहे तो बीमारी के गांव देहात तक फैलने के बाद बाढ़ की तरह हेलीकॉप्टर से हवाई सर्वेक्षण ही कर पाइएगा बस। और कोई रास्ता नहीं बचेगा।

आलेख के लेखक मिथिला स्टूडेंट के राष्ट्रीय महासचिव आदित्य मोहन हैं। लेख में व्यक्त विचार उनके निजी विचार हैं।