देश मनोरंजन

हॉकी स्टिक थामे गोल करने निकली प्रियंका सिंह अब फ़िल्मी पर्दे पर कर रही कमाल !

डेस्क: किसी ने सच ही कहा है कि सपने बड़े देखने चाहिए। और फिर उसके पूरे होने तक हार नहीं मानना चाहिए। कुछ इसी जज्बे के साथ आज यूपी के सहारनपुर जैसे छोटे शहर से आने वाली अभिनेत्री प्रियंका सिंह आज बॉलीवुड में अपना नाम रौशन कर रही हैं। प्रियंका कभी हॉकी स्टिक लेकर मैदान में गोल करते भागा करती थी, लेकिन दिल सिनेमा में लगता था। उन्होंने बॉलीवुड को सपने में देखा और उसे साकार करने के लिए मुंबई गयी।

May be an image of 1 person, sunglasses and outdoors
प्रियंका सिंह

लेकिन कहा जाता है कि मुंबई सबको रास नहीं आती और वहां स्थापित होने आसान नहीं। यह प्रियंका के साथ भी हुआ और उन्हें बेहद संघर्ष के बाद एक समय वापस सहारनपुर लौटना पड़ा। लेकिन फिर 2018 में रिलीज हुई अपनी पहली बॉलीवुड फिल्म ‘काशी – इन सर्च ऑफ गंगा’ से उन्होंने डेब्यू की और आज ‘सुस्वागतम खुशामदीद’ फिल्म में प्रियंका सिंह, पुलकित सम्राट और इसाबेल कैफ के साथ महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आने वाली हैं।

लेकिन उससे पहले हम बात करते हैं, उनके शुरुआती दिनों की। प्रियंका सिंह आज छोटे शहर से आने के बावजूद बॉलीवुड में एम मुकाम पाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से ताल्लुक रखनेवाली प्रियंका सिंह की कहानी भी कुछ ऐसी ही असाधारण सी कहानी है। सहारनपुर के पुलिस लाइन में रहनेवाली प्रियंका सिंह दिवंगत पिता का संबंध पुलिस महकमे से रहा। मां आज भी पुलिस की वर्दी पहनकर देश और समाज की सेवा में जुटी हुईं हैं।

May be an image of 1 person, standing, footwear and sunglasses
प्रियंका सिंह

स्कूल और कॉलेज में पढ़ाई करते हुए प्रियंका सिंह ने रंगमंच पर अभिनय तो किया, मगर बॉलीवुड की फिल्मों में काम करने का उनका सपना एक दिन सच हो जाएगा, इसका इल्म उन्हें भी नहीं था।स्कूल-कॉलेज में पढ़ाई के साथ-साथ हाथ में हॉकी स्टिक थामे गोल करने और रोकने की भागमभाग भी चल रही थी। ऐसे में उस वक्त प्रियंका सिंह को लगता था कि वो एक दिन हॉकी खिलाड़ी बनकर अपने प्रदेश और देश का नाम ऊंचा करेंगी। लेकिन फिल्मों में एक्टिंग करने का जुनून उन्हें किसी शक्तिशाली चुम्बक की तरह मुंबई की ओर आकर्षित कर रहा था। मन में बॉलीवुड में जाकर हाथ आजमाने, ना आजमाने की ऊहा-पोह के बीच आखिरकार प्रियंका सिंह ने मुंबई का रुख कर लिया।

May be an image of 1 person, flower and outdoors
प्रियंका सिंह

चार साल पहले लिये गए अपने इस फैसले का प्रियंका सिंह को आज भी कोई अफसोस नहीं है और वो अपने फैसले से काफी खुश हैं।प्रियंका कहती हैं, ‘ मैं हमेशा अपने काम में फोक्‍स्‍ड रहती हूं। बिना फोक्‍स्ड हुए कोई भी काम आसान नहीं होता है। आज अपने हौसले और जज्बे से मैं सहारनपुर की एक साधारण सी लड़की बॉलीवुड में एक मुकाम हासिल करना चाहती हूं। देश के छोटे-छोटे गांवों और शहरों में रहने वाले ना जाने कितने लोगों के मन में बॉलीवुड के सपने पला करते हैं। इनमें से कई ख्वाब हकीकत बनकर अलग तरह की मिसालें भी पेश कर जाते हैं।

प्रियंका की लाइफ में एक वक्त ऐसा भी था जब प्रियंका सिंह को लगता था कि शायद बॉलीवुड की फिल्मों में काम करना उनकी किस्मत में नहीं है। ऐसे में मुंबई में रोजमर्रा की संघर्ष के बीच ऑडिशन पर ऑडिशन देती प्रियंका सिंह हताश होती चलीं गईं और फिर वापस सहारनपुर लौट गईं, कभी वापस लौटकर नहीं आने के लिए। मगर एक दिन मुंबई ने फिर से प्रियंका सिंह को आवाज दी। एक दिन एक ऐड फिल्म में काम करने का ऑफर आया तो प्रियंका सिंह पशोपेश में पढ़ गईं कि आखिर फिर से मुंबई का रुख करें भी या ना करें।

May be an image of 1 person, standing, footwear and outdoors
प्रियंका सिंह

लेकिन अब प्रियंका सिंह का मानना है कि एक बार फिर से मुंबई आने का फैसला उनके लिए बहुत अच्छा साबित हुआ। वापस लौटने के बाद उन्हें फिल्मों को अच्छे ऑफर मिलने लगा।इसको लेकर प्रियंका कहती हैं, “अगर मैंने सहारनपुर से वापस लौटने का फैसला नहीं लिया होता तो मेरा फिल्मों में काम करने का सपना कभी पूरा नहीं होता। बॉलीवुड में अपना मकाम बनाने के लिए यकीनन यहां संघर्ष करना पड़ता है मगर वो कहते है न कि मेहनत और सब्र का फल मीठा होता है। कुछ इसी तरह मेरी मेहनत भी रंग लाई है। अब मैं अलग-अलग और रोचक किरदार निभाकर लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाना चाहती हूं।

May be an image of 1 person, sunglasses and pool
प्रियंका सिंह

उन्होंने कहा कि ‘नॉन फिल्मी बैकग्राउंड से आकर बॉलीवुड में अपनी जगह बनाना आसान नहीं रहा। प्रियंका ने कहा कि उनके माता पिता दोनों ही पुलिस में हैं तो घर का माहौल पहले से ही थोड़ा सख्त था, लेकिन फिर भी मेरे माता पिता ने मेरा साथ दिया और मैंने सहारनपुर से मायानगरी तक का सफर तय कियाप्रियंका कहती हैं कि ‘मुंबई आना ही काफी नहीं था, यहां काफी स्ट्रगल था। बार-बार निशारा हाथ लगने के बाद मैंने यहां से जाने का फैसला कर लिया था, लेकिन मैंने अपने मन को और पक्का किया और फिर से मेहनत में जुट गई। मैं ये जरूर कहूंगी की इच्छा शक्ति और मेहनत आपको आपकी मंजिल तक पहुंचा ही देगी, इसलिए चाहें कुछ भी हो किसी को भी कभी भी गिवअप नहीं करना चाहिए।

आलेख और इमेज : सीनियर जर्नलिस्ट अनूप नारायण सिंह