बिहार राजनीती राज्य

क्या कन्हैया को लेकर राजद सहज नहीं है ? तेजस्वी का दो टूक-“ऐसा नही चलने वाला”

डेस्क: इस बार राजद कार्यकारणी की बैठक में नीतीश और मोदी से कही ज्यादा कांग्रेस छाया रहा। तेजस्वी कांग्रेस के साथ रिश्ते को लेकर खुल कर अपनी बात रखी उन्होंंने कहा कि कांग्रेस के बिना देश मे विपक्ष की मजबूती सम्भव नही है,पर क्षेत्रीय दलों को राज्यों में ड्राइविंग सीट पर रखना होगा,बिहार में सबसे बड़ी पार्टी राजद है,बिहार में राजद को ही कमजोर किया जा रहा है,ऐसा नही चलने वाला।

बिहार विधानसभा में हमने कांग्रेस को 70 सीटें दी ,हर लोग कहते है यह बहुत ज्यादा था और महागठबंधन की सरकार नहीं बनी इसमें कांग्रेस का परफॉर्मेंस आड़े आया ।,राष्ट्रीय मुद्दों पर मेरी पार्टी कांग्रेस के साथ है,बिहार में भी कांग्रेस को साथ देना चाहिए,राजद ने हमेशा त्याग किया है,बीजेपी को रोकने के लिए राजद को समर्थन करना चाहिए।हर क्षेत्रीय पार्टी ने एनडीए के साथ कभी न कभी समझौता किया,राजद ने कभी भी एनडीए के साथ समझौता नहीं किया ।राजद के इस चरित्र का सम्मान होना चाहिए।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा ने तेजस्वी के बयान पर कहा है कि बिहार में धर्मनिरपेक्ष ताकतों के साथ कांग्रेस हमेशा खड़ी रही है और 1991 और 2000 में कांग्रेस के कारण ही उनकी सरकार बनी और इस वजह से बिहार में कांग्रेस को अपना आधार वोट भी दाव पर लगाना पड़ा फिर भी कांग्रेस धर्मनिरपेक्षता की रक्षा के लिए हमेशा खड़ी रही ।

कांग्रेस विधायक शकील अहमद खा का कहना है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान राजद की भूमिका ऐसा लग रहा था जैसे राजद बीजेपी को मदद कर रही है जो गठबंधन विधानसभा चुनाव के दौरान हुआ वह गठबंधन लोकसभा चुनाव के दौरान हुआ रहता तो परिणाम कुछ और ही हुआ होता है । रही बात विधानसभा चुनाव में 70 सीट देने का तो देख लीजिए कैसा कैसा सीट कांग्रेस को दिया गया वो भी नामांकन शुरु होने के बाद कहा जा रहा था कि इस सीट पर आप चुनाव लड़िए ।

कांग्रेस के परफॉर्मेंस की बात हो रही है राजद को जवाब देना चाहिए ना अब्दुल बारी सिद्दीकी सहित 7 मुस्लिम उम्मीदवार क्यों चुनाव हार गये । बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी ऐसे में बेहतर है कि मिल बैठकर बात करे कांग्रेस हमेशा धर्मनिरपेक्षता को बचाये रखने के लिए कुर्बानी देती रही है क्षेत्रीय दलों को भी उसका सम्मान करना चाहिए ।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अचानक ऐसा क्या हुआ जो राजद को इस तरह का बयान देना पड़ा,बिहार की राजनीति पर नजर रखने वाले राजनीतिक टीकाकार का मानना है कि समस्या कांग्रेस नहीं है समस्या कन्हैया है लोकसभा चुनाव में भी गठबंधन को लेकर जो समस्या खड़ी हुई थी उसके पीछे भी वजह कन्हैया ही था राहुल गांधी चाहते थे कि राजद कन्हैया का समर्थन करे लेकिन राजद इसके लिए तैयार नहीं हुआ। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस जिस तरह का गठबंधन चाह रही थी उसके लिए राजद तैयार हो जाता तो फिर लोकसभा का जो चुनाव परिणाम सामने आया वो स्थिति नहीं रहती है।

इसकी वजह यह है कि राजद के जो थिंक टैंक हैं वो शुरु से ही कन्हैया को लेकर कुछ ज्यादा ही सजग है उनका मानना है कि कन्हैया की बिहार की राजनीति में सक्रियता बढ़ी तो तेजस्वी को नुकसान हो सकता है। और इसी सोच के तहत राजद काम कर रही है दूसरी और कन्हैया का मुस्लिम वोटर पर अच्छा पकड़ है समस्या यह भी है इसलिए राजद चाहती है कि कन्हैया को लेकर कांग्रेस अपने रुख में बदलाव करे और विधानसभा उप चुनाव में और विधान परिषद के चुनाव में जो समझौता नहीं हुआ उसकी वजह यही है ।

आलेख: संतोष सिंह (सीनियर जर्नलिस्ट)