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सीता तीर्थक्षेत्र न्यास के द्वारा सीता नवमी को “भारतीय स्त्री दिवस” के रूप में मनाया जाएगा

डेस्क:वैशाख मास की शुक्ल पक्ष नवमी तिथि को भगवान श्रीराम के धर्मपत्नी सीताजी का प्रकाट्य हुआ था, इसलिए इसे सीता नवमी (सीता प्राकट्य दिवस) या सीता जयंती के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन माता सीता का पूजन किया जाता है। इस बार सीता प्राकट्य दिवस (सीता नवमी ) 10 मई 2022 (मंगलवा) को मनाया जाएगा।

स्त्री-सशक्तिकरण की सबसे बड़ी उदाहरण मिथिला की सांस्कृतिक धरोहर माता सीता आज भी उपेक्षित हैं। लेकिन हाल के वर्षों में सीता नवमी को लेकर लोगों में जागरुकता देखा गया है। इसी क्रम में “सीता तीर्थक्षेत्र न्यास” के संस्थापक पूर्व केन्द्रीय मंत्री व् बिहार विधान परिषद के सदस्य संजय पासवान के द्वारा पिछले दस बरस से सीता नवमी पर उपासना और विमर्श का आयोजन होता रहा है।

इस वर्ष 10 मई को होने वाले सीता नवमी को “सीता तीर्थक्षेत्र न्यास” के द्वारा “भारतीय स्त्री दिवस” के रूप में मानाने का निर्णय लिया है। इस असर पर “स्त्री विमर्श का भारतीय संदर्भ” के विषय पर परिचर्चा भी आयोजित है. वहीं, समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाली स्त्रियों को “सीता सखी सम्मान” भी दिए जाएँगे। बता दें कि यह कार्यक्रम विधान परिषद सभागार, पटना में दोपहर 1 बजे शुरू होगा।

कार्यक्रम को लेकर आयोजित प्रेसवार्ता में बिहार विधान परिषद के सदस्य संजय पासवान ने सोमवार को कहा-“पिछले दस बरस से हम लोग सीता नवमी पर उपासना और विमर्श करते आ रहे है। सीता मिथिला की बेटी है। हमारे लिए किशोरी दाई है। पुनः इस बार 10 मई (मंगलवार) को विधान परिषद सभागार में स्त्री विमर्श का भारतीय संदर्भ के विषय पर परिचर्चा और प्रथम सीता सखी सम्मान का आयोजन है। आप सभी मित्रों का स्वागत है। आइए और बिहार से एक वैश्विक स्त्री विमर्श के नींव की शुरुआत करे।”