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चक्रव्यूह में CM नीतीश: बिहार की राजनीति के लिए मई,जून और जुलाई है काफी महत्वपूर्ण !

Desk: कल शाम एक मित्र के शादी के 25वें सालगिरह के मौके पर आयोजित भोज में शामिल होने पहुंचे ही थे कि एक फोन आया, फोन पर बात जैसे जैसे आगे बढ़ती गयी पार्टी का ख़याल जेहन से निकलता गया और फिर पार्टी स्थल से कैसे बाहर निकले याद भी नहीं है। हुआ ऐसा कि दिल्ली के लुटियंस जोन पर खास पकड़ रखने वाले मेरे एक खास बाँस का फोन आया कांलेज वाला बाँस ,संतोष क्या हाल है ठीक है बाँस, कहां हो बड़ा शोरगुल हो रहा है जी एक मित्र हैं उनके शादी का 25वाँ सालगिहर है उसी में आये हैं कई पूराने मित्र से इसी बहाने मुलाकात हो जायेगी। अरे साँरी मस्ती करो कल सुबह बात करते हैं वैसे दस मिनट समय हो तो अभी भी बात हो सकती है अरे ऐसा क्या है बाँस बाहर निकलते हैं।

जी कुछ खास है क्या ,संतोष एक बात बताओ नीतीश कुमार का क्या हाल है जी धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात के बात नीतीश तनाव मुक्त दिख रहे हैं और डीएम एसपी का तबादला जो कई माह से रुका हुआ था वो बड़े स्तर किये हैं । तबादला को देखने से लगता है कि बीजेपी के विधायकों की नहीं चली है जिस अंंदाज मे नीतीश तबादला करते रहे हैं तबादला का स्वरुप कुछ वैसा ही दिख रहा है,वैसे आज जनता दरबार था जनता दरबार के बाद मीडिया से बात करते हैं उस दौरान कॉमन सिविल कोड और जातीय जनगणना मामले में नीतीश पहले जैसे मुखर होकर बोलते थे वो अंदाज आज नहीं था ।

अच्छा एक बात बताओ संतोष अतीश चन्द्रा तुम्हारे बिहार कैडर का अधिकारी रहा है इसका कैसा काम काज रहा है ,कुछ खास तो नहीं रहा है हाँ मुख्यमंत्री के साथ 10 वर्षो से अधिक समय तक साथ रहे हैं, पत्नी आईपीएस है। वही तो अतीश चन्द्रा केन्द्र में भी किसी महत्वपूर्ण विभाग में पहले नहीं रहा है तुमको जानकारी है अतीश चन्द्रा को पीएमओ में पोस्ट किया गया है और यह पोस्ट ऐसे ही अधिकारी को मिलता है जो पीएम या फिर पीएम का ब्यूरोक्रेसी देखने वाले खासम खास अधिकारी के करीब हो, अतीश चन्द्रा दोनों योग्यता में फिट नहीं बैठ रहा है फिर इसकी पोस्टिंग पीएमओ में क्यों हुई इस पर सोचे हो ,सही कह रहे हैं जब इनकी पोस्टिंग हुई थी तो मुझे भी आश्चर्य हुआ था कई लोगों से मैंने बात भी किया तो पता चला कि अभी जो रेल मंत्री है वो भी 1994 बैच के आईएस अधिकारी रहे हैं और इनके अच्छे मित्र हैं इसी वजह से ये जगह मिली है।

संतोष एक बात बताओ नीतीश कुमार नेता पर भरोसा करते हैं या फिर अधिकारी पर जहां तक मुझे लगता है अधिकारी पर ज्यादा भरोसा करते हैं। ठीक है तो बताओ नीतीश कुमार के सबसे करीबी अधिकारी कौन कौन रहा है जिसका सीधा प्रवेश किचेन तक रहा हो ,एक जो पहले आरसीपी थे अब वो मंत्री है, दूसरा अंजनी कुमार सिंह थे वो तो बिहार में ही है सरकार उन्हें बिहार म्यूजियम का महानिदेशक बना दिया है। चंचल कुमार तीसरे अधिकारी थे जो रेलमंत्री के समय से ही साथ हैं आज कल केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर है चौथा अतीश चन्द्रा हैं वो भी केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर ही है।

मतलब ये चार ऐसे अधिकारी हैं जिन्हें नीतीश कुमार का सब कुछ पता होगा जी जरुर है ये चारों साये की तरह नीतीश कुमार के साथ रहते थे मतलब मोदी को विभीषण मिल गया यही समझने के लिए तुमको फोन किये थे अच्छा नीतीश आज कल इसलिए ज्यादा परेशान दिख रहे हैं।ठीक है वैसे आपको लगता क्या है बिहार मे होगा क्या देखो मुझे राजनीति तो आती नहीं है हाँ ब्यूरोक्रेसी के सहारे जो खेल होता है उसको समझते है और आज कल ब्यूरोक्रेसी के सहारे ही राजनीति साधी जा रही है इसलिए आजकल राजनीति भी समझने लगे हैं।

क्या बात है बाँस हहाहहाहाहा तब तो नीतीश उपराष्ट्रपति का पद लेकर दिल्ली निकल जाएंगे क्या बचपना वाला बात करते हो उपराष्ट्रपति वाली खबर भी नीतीश कुमार का ही प्लांट करवाया हुआ है, एक बात समझ लो नीतीश की ही तरह मोदी भी दुश्मन से राजनीतिक मजबूरी है तो हाथ मिला लेगा लेकिन दिल कभी भी नहीं । सारा बिल राज्यसभा से पास होना जरुरी है फिर इस बार राज्यसभा में इनकी स्थिति पहले से कमजोर होने वाली है ऐसे में नीतीश कुमार को राज्यसभा का सभापति बनायेगा, सोचो भी नहीं कब कौन बिल लटका देगा कोई भरोसा है नीतीश कुमार भी भारतीय राजनीति में कुछ ऐसा करके जाना चाहता है कि उसका नाम हमेशा याद रखा जाये।

मोदी ना बाबा ना कभी नीतीश कुमार पर दाव नहीं लगा सकता है, तो फिर नीतीश कुमार करेंगे क्या जहां तक मेरी समझ है नीतीश कुमार 2024 का लोकसभा चुनाव मुंगेर से लड़ेगा और मोदी बहुमत से दूर रह गया तो फिर पीएम की दावेदारी पेश करेंगा। वैसे बिहार की राजनीति के लिए मई,जून और जुलाई काफी महत्वपूर्ण है लालू से हाथ मिलाने वाले ये नहीं है इनको पता चल गया है कि ऐसा किये तो पार्टी टूटेगी और फाइल भी खुलेगा नीतीश कमजोर खिलाड़ी नहीं है साथ रहते जीतना बीजेपी को वो नुकसान पहुंचा सकते हैं उतना अलग होकर नहीं कर सकते हैं।

वही नीतीश को पता है कि मोदी के लिए नीतीश मजबूरी है बिहार को लेकर मोदी अभी भी सहज नहीं है बस देखना यही है कि इस खेल में कौन किसका किस तरीके से इस्तमाल करता है और इसमें नीतीश माहिर खिलाड़ी है । तुम्हारे बिहार के लिए कुछ अच्छा ही होगा तीन माह आंख कान खोल कर रखना चलो तुम्हारा पार्टी तो ले लिए सांरी आओ दिल्ली दोनों भाई चलेंगे एक सप्ताह के लिए कश्मीर चल बाय गुड नाइट।

आलेख: वरिष्ठ पत्रकार संतोष सिंह के फेसबुक टाइमलाइन से