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नाबालिग भाई ने किया बहन का रे”प, प्रेग्नेंट होने पर कोर्ट ने दी बच्चा गिराने की इजाजत और…

डेस्क: बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ता के वकील शमीना सलाहुद्दीन ने कोर्ट को बताया कि नाबालिग पहले अपनी प्रेग्नेंसी की बात से अंजान थी. हालांकि, दो महीने से उसे पीरियड्स नहीं आए थे. फिर अचानक उसे एक दिन पेट दर्द हुआ. तो लड़की के मां-बाप उसे अस्पताल लेकर गए. जहां मेडिकल टेस्ट में नाबालिग के प्रेगनेंट होने का खुलासा हुआ.

वहीं, इस सुनवाई के दौरान सरकारी वकील एस अप्पू ने अबॉर्शन पर रोक लगाते हुए दलील दी थी कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) एक्ट 1971 के तहत, गर्भपात कराने की अवधि 24 सप्ताह तक ही सीमित है.

लगातार बच्चे इंटरनेट का गलत इस्तेमाल कर रहे है. बच्चों को इंटरनेट पर आसानी से पोर्न मिल जाता है. इससे उनपर गलत असर पड़ रहा है. बढ़ते चाइल्ड प्रेग्नेंसी के मामलों को रोकने के लिए सेक्स एजुकेशन पर दोबारा विचार करने की आवश्कता है.

ये टिप्पणी केरल हाईकोर्ट की है. कोर्ट में एक 13 साल की रे”प पीड़िता के अबॉर्शन से संबंधित याचिका पर सुनवाई चल रही थी. लड़की 30 हफ्ते की प्रेगनेंट थी. हाईकोर्ट ने रेप पीड़िता को अबॉर्शन की अनुमति दे दी है. लेकिन इस दौरान केरल हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़कियों के गर्भवती होने के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई. बता दें कि पीड़िता के भाई ने ही उसका रे”प किया था.

पीड़िता के माता-पिता ने कोर्ट में याचिका दायर कर गर्भपात कराने की इजाजत मांगी थी. कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को सरकारी अस्पताल में गर्भपात कराने के निर्देश दिए हैं. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ये भी कहा कि यकीन करना मुश्किल है, लेकिन ये कड़वा सच है कि पीड़िता को उसके भाई ने प्रेगनेंट किया जो खुद एक नाबालिग है.

कोर्ट ने अबॉर्शन की इजाजत देते हुए याचिकाकर्ता को एक अंडरटेकिंग दाखिल करने के भी निर्देश दिए हैं. जिसमें लिखा हो कि नाबालिग रे”प पीड़िता के परिवार के जोखिम पर उसका गर्भपात कराया जा रहा है.

कोर्ट ने अबॉर्शन की इजाजत देते हुए एक अंडरटेकिंग दाखिल करने को भी कहा है. अंडरटेकिंग में परिवार को लिख कर देना होगा कि अबॉर्शन के दौरान लड़की को होने वाले जोखिम के बारे में उन्हें पूरी जानकारी है.

लेकिन, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसले सुनाया. हालांकि, कोर्ट ने इस दौरान कई गंभीर समस्याओं का भी जिक्र किया. जस्टिस वी जी अरुण ने 13 साल की गर्भवती को अबॉर्शन की इजाजत देते हुए कहा,

इस मामले पर फैसला सुनाने से पहले, मैं नाबालिगों के प्रेगनेंट होने के मामलों में बढ़ोतरी पर चिंता व्यक्त करना चाहता हूं. इनमें से कुछ मामलों में नजदीकी रिश्तेदार भी शामिल होते हैं. मेरे ख्याल में, समय आ गया है कि हमारे स्कूलों में दी जा रही सेक्स एजुकेशन (यौन शिक्षा) पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए. इंटरनेट पर आसानी से मिल जाने वाली पोर्न फिल्मों से युवाओं के दिमाग पर गलत असर पड़ता है. सभी बच्चों को इंटरनेट और सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग के बारे में बताना बेहद जरूरी है.”

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार, 21 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले को पलटते हुए अविवाहित महिला को 24 हफ्ते की प्रेग्नेंसी को खत्म करने का आदेश दिया था.

Source: the lallantop