Mulayam Singh Yadav Death
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Mulayam Singh Yadav: कौन थीं Sadhna Gupta ? जिनसे मुलायम सिंह यादव को हो गया था प्यार, जानें कैसे शुरू हुई दोनों की कहानी

Mulayam Singh Yadav Death: समाजवादी पार्टी के संरक्षक और पूर्व अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) का सोमवार को लंबी बीमारी के बाद गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। 3 बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार में रक्षामंत्री रहे मुलायम सिंह (Mulayam Singh Yadav latest news) को देश के दिग्गज राजनेताओं में से एक कहा जाता था। सपा सहित विपक्ष के नेताओं ने उनकी मृत्यु पर शोक जताया है। बता दें कि कुछ महीने पहले सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता का भी गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया था।

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Mulayam Singh Yadav से 20 साल छोटी थीं Sadhna Gupta

साधना गुप्ता मूल रूप से यूपी के इटावा के बिधुना (अब औरैया जिले का हिस्सा है) की रहने वाली थी। 2003 में पहली पत्नी मालती देवी के निधन के बाद मुलायम सिंह यादव ने साधना को पत्नी का दर्जा दिया था। साधना गुप्ता सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव से 20 साल छोटी थीं। साधना समाजवादी पार्टी में एक कार्यकर्ता के रूप में काम कर चुकी थीं। वहीं, बताया ये भी जाता है कि प्रतीक यादव के स्कूल फॉर्म पर पिता का नाम एमएस यादव और एड्रेस में नेता जी के ऑफिस का पता दिया था।

मुलायम सिंह के साथ साधना ने की थी दूसरी शादी

साधाना की शादी 4 जूलाई साल 1986 को फर्रुखाबाद के व्यापारी चंद्रप्रकाश गुप्ता से हुई थी। इसके एक साल बाद 7 जुलाई साल 1987 को उन्होंने बेटे प्रतीक यादव को जन्म दिया। प्रतीक के जन्म के करीब दो साल बाद साधना और चंद्रप्रकाश अलग हो गए। दोनों का तलाक हो गया। पहले पति चंद्र प्रकाश गुप्ता से अलग होने के बाद साधना गुप्ता ने राजनीति में कदम रखा। इस दौरान उनकी मुलाकात मुलायम सिंह यादव से होने लगी। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं।

लकी साबित हुईं थी Sadhna Gupta

1987 में पति से अलग होने के बाद साधना मुलायम की जिंदगी में आईं। दोनों की मुलाकात बढ़ती गई और प्यार भी। रिपोर्ट्स के मुताबिक शुरुआत में साधना और मुलायम की आम मुलाकातें होती थीं, लेकिन मुलायम की मां की वजह से दोनों करीब आए। इस बीच, साधना मुलायम के लिए लकी साबित हुईं। 1989 में मुलायम यूपी के मुख्यमंत्री बन गए।

नर्स के तौर पर मुलायम की मां की देखभाल करने से प्रभावित थे

अखिलेश यादव की बायोग्राफी ‘बदलाव की लहर’ में मुलायम सिंह और साधना के रिश्ते का भी जिक्र है। इस किताब में बताया गया है कि मुलायम की मां मूर्ती देवी अक्सर बीमार रहती थीं। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तब साधना गुप्ता मूर्ति देवी की देखभाल करती थीं। एक बार सैफई मेडिकल कॉलेज में एक नर्स गलत इंजेक्शन लगाने जा रही थी, उस वक्त साधना ने ही नर्स को रोका था। दरअसल, साधना भी नर्स रही थीं। उन्होंने नर्सिंग का कोर्स करने के बाद उन्होंने कुछ दिनों तक नर्सिंग होम में काम भी किया था। जब ये बात मुलायम को मालूम हुई तो वह साधना से काफी प्रभावित हुए।

सिर्फ अमर सिंह को मालूम था

शुरुआत में अमर सिंह इकलौते ऐसे शख्स थे जो जानते थे कि मुलायम को प्यार हो गया है। उन्होंने किसी से कहा नहीं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 1988 में पहली बार मुलायम ने अखिलेश को साधना गुप्ता से मिलवाया। तब वो 15 साल के थे। कहा जाता है कि उस वक्त अखिलेश को साधना अच्छी नहीं लगीं। एक बार तो साधना ने उन्हें थप्पड़ मार दिया। इसके कुछ समय बाद मुलायम ने अखिलेश को पढ़ाई के लिए राजस्थान के धौलपुर स्थिति मिलिट्री स्कूल भेज दिया।

पहली पत्नी की मौत के बाद साधना को अपनाया

साल 2003 में मुलायम सिंह यादव ने सार्वजनिक तौर पर पहली बार साधना गुप्ता को अपनी पत्नी का दर्जा दिया। उसी साल मुलायम की पहली पत्नी और अखिलेश यादव की मां मालती देवी का निधन हुआ था। साल 2007 में आय से अधिक संपत्ति के मामले में सीबीआई जांच से बचने के लिए मुलायम सिंह यादव ने यह स्वीकार कर लिया था कि साधना गुप्ता उनकी दूसरी पत्नी हैं और उनका एक बेटा प्रतीक है। इसी के बाद पूरे देश को पता चला कि मुलायम की एक और पत्नी व उनसे एक बेटा है।

अखिलेश की नाराजगी पर हुआ था समझौता

साधना गुप्ता को पत्नी स्वीकार करने पर अखिलेश यादव अपने पिता मुलायम सिंह यादव से नाराज हो गए। वहीं बताया ये भी जाता है कि अखिलेश यादव ने साधना गुप्ता को अपने परिवार में कभी जगह नहीं दी। वह मानते हैं कि साधना गुप्ता और अमर सिंह के चलते उनके पिताजी ने उनकी मां के साथ न्याय नहीं किया। कहा जाता है कि तब समझौता हुआ था कि साधना के बेटे प्रतीक यादव राजनीति से दूर रहेंगे। साधना भी राजनीति से दूर ही रहीं। हालांकि, बाद में साधना गुप्ता की बहू और प्रतीक की पत्नी अपर्णा यादव ने जरूर राजनीति में कदम रखा। अपर्णा विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुकी हैं। अपर्णा फिलहाल भाजपा में हैं।