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Mulayam Singh Yadav: पिता चाहते थे पहलवान बनें मुलायम, अखाड़े से ही शुरू हुई नेता बनने की कहानी

आज उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का निधन हो गया है। जिसके बाद सरकार द्वारा तीन दिन का राजकीय शोक का ऐलान किया गया है। उनसे जुड़े कई किस्से सामने आ रहे हैं। ऐसा ही एक किस्सा सामने आया है। जब राजनीति में एंट्री करने से पहले मुलायम कुश्ती लड़ते थे।

दरअसल, वो एग्जाम छोड़कर कुश्ती लड़ने चले जाते थे। कवि सम्मेलन में अकड़ दिखा रहे दरोगा को मंच पर ही पटक दिया था। सियासत के भी बड़े अखाड़ेबाज बने, विरोधियों को चित किया। सियासी और निजी जिंदगी आसान नहीं थी, पर लड़ते रहे। मौत सामने आई तो उससे भी दो-दो हाथ किए। ये थे मुलायम सिंह यादव, समाजवादियों ही नहीं.. पूरे देश के नेताजी।

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बता दें,मैनपुरी के करहल का जैन इंटर कॉलेज। कैंपस में कवि सम्मेलन चल रहा था। यहां उस वक्त के मशहूर कवि दामोदर स्वरूप विद्रोही भी मौजूद थे। वो मंच पर पहुंचे और अपनी लिखी कविता ‘दिल्ली की गद्दी सावधान’ पढ़ना शुरू की। कविता सरकार के खिलाफ थी। इसलिए वहां तैनात UP पुलिस का इंस्पेक्टर मंच पर गया और उन्हें कविता पढ़ने से रोकने लगा। वो नहीं माने तो उनका माइक छीन लिया।

इंस्पेक्टर ने कवि को डांटते हुए कहा कि आप सरकार के खिलाफ कविता नहीं पढ़ सकते। मंच पर बहस हो ही रही थी कि दर्शकों के बीच बैठा 21 साल का पहलवान दौड़ते हुए मंच पर पहुंचा। 10 सेकेंड में उस नौजवान ने इंस्पेक्टर को उठाकर मंच पर पटक दिया। ये नौजवान कोई और नहीं बल्कि मुलायम सिंह यादव थे। वही ऐसा ही एक किस्सा है, जब नेताजी की इटावा और मैनपुरी में रैली थी। रैली के बाद वो मैनपुरी में अपने एक दोस्त से मिलने गए। दोस्त से मुलाकात के बाद वो 1 किलोमीटर ही चले थे कि उनकी गाड़ी पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई। गोली मारने वाले छोटेलाल और नेत्रपाल नेताजी की गाड़ी के सामने कूद गए।