त्यागमूर्ति चंदापुरी
देश बिहार राज्य

युगप्रवर्तक त्यागमूर्ति चंदापुरी के परिनिर्वाण दिवस पर “जातीय चेतना को वर्गीय चेतना चेतना में बदलने” विषय पर संगोष्ठी का हुआ आयोजन

पटना,31 अक्टूबर। संविधान में 340 वीं धारा के उत्प्रेरक, प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी तथा सामाजिक न्याय व भारतव्यापी पिछड़ा वर्ग आंदोलन के सूत्रधार युगप्रवर्तक त्यागमूर्ति आर एल चंदापुरी की 18 वीं परिनिर्वाण दिवस पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन आज स्थानीय महात्मा फुले संस्थान में की गई। अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ के तत्वाधान में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में “जातीय चेतना को वर्गीय चेतना चेतना में बदलने” विषय पर वैचारिक संगोष्ठी में विभिन्न सामाजिक,बौद्धिक व राजनेतिक संगठनों के प्रबुद्ध संचालकों ने त्यागमूर्ति चंदापुरी के बताए रास्ते पर चलते हुए अतिपिछड़ों-पिछड़ों, गरीबों-वंचीतों के संवैधानिक अधिकारों को प्राप्त करने के लिए “आजादी की दूसरी लड़ाई” तेज करने का संकल्प लिया।अध्यक्षता संघ के प्रदेश संरक्षक रोहन भगत मालाकार उर्फ भंते ज्ञान कीर्ति ने की।

त्यागमूर्ति चंदापुरी आजादी की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई थी

श्रद्धांजलि सभा सह वैचारिक संगोष्ठी की शुरुआत पूर्व न्यायमूर्ति राजेंद्र प्रसाद यादव,आईआईटियन डॉ जितेंद्र पासवान व भारतीय मोमिन फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ महबूब आलम अंसारी के द्वारा त्यागमूर्ति आर एल चंदापुरी के चित्र पर माल्यार्पण कर की गई।

अपने उदघाटन भाषण में पूर्व न्यायाधीश राजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि त्यागमूर्ति आर एल चंदापुरी ने ही सर्वप्रथम पिछड़ों- अतिपिछड़ों वर्ग को परिभाषित किया और उनके द्वारा शुरू किए गए पिछड़ा वर्ग आंदोलन से ही सत्ता और विपक्ष में सामाजिक न्याय की स्थापना हो सकी जिसका फल हम सभी भोग रहे हैं।उन्होंने आजादी की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई जिसकी प्रशंसा स्वयं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने मसौढ़ी शांति मिशन मार्च के दौरान की थी । उन्होंने देश की आजादी,,समाज सुधार व जनजागरण के क्रांतिकारी कार्यक्रमों की सफलता के लिए आजीवन संघर्ष,त्याग तथा यातनाएं झेली थी। उनका यह संघर्ष जाति प्रथा की जड़ता के विरुद्ध उनकी विचारधारा की लड़ाई थी जिसने देश व प्रदेश की सत्ता परिवर्तन में भारी परिवर्तन लाया है।

अतिपिछड़ों,गरीबों व वंचितों का सच्चा हितैषी व महान योद्धा थे त्यागमूर्ति चंदापुरी

आईआईटियन डॉ. जितेंद्र पासवान ने त्यागमूर्ति चंदापुरी को दलितों,पिछड़ों,अतिपिछड़ों, गरीबों व वंचितों का सच्चा हितैषी व महान योद्धा बताया जिन्होंने विगत 6 नवंबर 1951 में डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर को पटना के गांधी मैदान में सभा का आयोजन कर देश में दलितों,पिछड़ों, अल्पसंख्यकों एवम गरीबों को एक मंच पर लाकर एकजुट होने का संदेश दिया था जिसकी आज जरूरत है।

डॉ.महबूब आलम अंसारी ने त्यागमूर्ति चंदापुरी के जीवनपर्यंत संघर्षों को सामाजिक न्याय,धर्मनिरपेक्षता,मानवगरिमा व वंचितों के विभिन्न हिस्सेदारों को समान बंटवारे पर केंद्रित बताया। श्रद्धांजलि सभा को राष्ट्रीय महिला अध्यक्षा शांति शाह,राष्ट्रीय महासचिव सिपाही यादव,संघठन सचिव रंजीत पटेल,महासचिव लालमोहन सिंह, कोषाध्यक्ष ई. के. के. सिंह चंदापुरी,संघठन सचिव शोभा देवी, ई. राजकुमार पासवान,प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष जितेंद्र कुमार चंद्रवंशी, संगठन सचिव श्रीमती शिल्पा कुमारी,राष्ट्रीय सचिव डॉ. एल बी सिंह , मिथिलेश कुमार यादव आदि गणमान्य लोगों सहित बड़ी संख्या में अतिपिछड़ों-पिछड़ों व गरीबों-वंचितों ने त्यागमूर्ति चंदापुरी को श्रद्धांजलि दी व सभा को संबोधित किया।