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बिहार के शिक्षकों के लिए खुशखबरी: नीतीश कुमार ने कर दिया बड़ा ऐलान

बिहार में शिक्षकों की बहाली जल्द शुरू होगी, जितने पद खाली हैं, उनको भरा जाएगा. ये बात मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कही है. मुख्यमंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती पर आयोजित शिक्षा दिवस के कार्यक्रम में बोल रहे थे.उन्होंने कहा कि हम जहां जाते हैं, वहां शिक्षक मिल जाते हैं. कल भी एक जगह गया, तो शिक्षक अभर्थियों ने बहाली की बात रखी. इसके बाद हमने निर्देश दिया है कि जल्द बहाली शुरू करें. यहां पर शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव समेत सब लोग बैठे हुए हैं. आप लोग जल्द बहाली का काम शुरू कराईए.

संस्थान कब खुला बताईए

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में कब कौन संस्थान खुला, इसके बारे में भी पढ़ाईए और बताइए, क्योंकि लोग भूलते जा रहे हैं. पटना के इंजीनियरिंग कॉलेज में हम पढ़े थे, जब केंद्रीय मंत्री बने, तो उसको एनआईटी करवाया. इसके लिए तत्कालीन मानव संसाधन मंत्री मुरली मनोहर जोशी से बात की थी, उन्होंने कैबिनेट में स्पेशल प्रस्ताव लाकर पटना में एनआईटी खोलने को मंजूरी दी थी. आईआईटी को 500 एकड़ जमीन दी, लोग भूलते जा रहे हैं कि आईआईटी कैसे बिहार में खुला. केंद्र में यूपीए की सरकार थी, तब अर्जुन सिंह मानव संसाधन मंत्री थे, उनसे हमने बात की थी, अनुरोध किया, तब जाकर यहां आईआईटी खुला.

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि अभी राज्य में आधी फीसदी से भी कम बच्चे ऐसे हैं, जो स्कूल नहीं जाते, लेकिन हम सबको शिक्षित करना चाहते हैं. यहीं कारण है कि बिहार में शिक्षा पर सबसे ज्यादा खर्च किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि राज्य के बजट का 25 फीसदी शिक्षा पर खर्च हो.

इतने दिन क्यों ध्यान नहीं दिया

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि अभी शिक्षा के क्षेत्र में जो संस्थान हैं, उनकी नींव रखने का काम मौलाना अबुल कलाम आजाद ने किया था. देश से आईआईटी खोलने की शुरुआत की थी, लेकिन उनके योगदान पर ध्यान नहीं दिया गया. आजादी के बाद इतने दिन तक भुलाए रखा गया. 2007 में पहली बार बिहार में मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती को शिक्षा दिवस के रूप में हम लोगों ने मनाना शुरू किया. इसके बाद हमने तत्कालीन मानव संसाधन मंत्री अर्जुन सिंह से बात की, तो उन्होंने हमारी बात मानी और 2008 से पूरे देश में मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती को शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाने लगा.