Khabarilaal News Desk :
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत दंड और प्रवर्तन व्यवस्था को सख्त करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने दोनों से विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है।
याचिका में क्या कहा गया?
याचिका में आरोप लगाया गया है कि मौजूदा व्यवस्था देश में मिलावटी और असुरक्षित खाद्य पदार्थों की बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण लगाने में असफल रही है। यह याचिका IVF विशेषज्ञ डॉ. अनिरुद्ध मलपानी द्वारा दायर की गई थी, जिस पर जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ सुनवाई कर रही है।
जुर्माने की राशि को बताया गया कम
याचिका में कहा गया है कि खाद्य सुरक्षा कानून के तहत तय जुर्माने बड़ी कंपनियों के लिए बेहद कम हैं, जिससे यह एक तरह से “कॉस्ट ऑफ डूइंग बिजनेस” बनकर रह गया है। उदाहरण के तौर पर सब-स्टैंडर्ड खाद्य पदार्थों पर अधिकतम 5 लाख रुपये और मिसब्रांडिंग पर 3 लाख रुपये तक का जुर्माना तय है।
कानून सही, लेकिन लागू करने में कमी
याचिकाकर्ता का कहना है कि कानून अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में गंभीर कमियां हैं। इससे मिलावटखोरी पर रोक लगाने में प्रणाली प्रभावी साबित नहीं हो रही है।
CAG रिपोर्ट का हवाला
याचिका में CAG की 2017 रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें कहा गया था कि लगाए गए करीब 47% जुर्माने वसूले नहीं जा सके। साथ ही कई मामलों में समय पर निर्णय नहीं हो पाए।
प्रमुख दलीलें
- जुर्माना बड़ी कंपनियों के लिए पर्याप्त नहीं
- मिलावटी खाद्य पदार्थों पर नियंत्रण कमजोर
- वसूली और कार्रवाई की प्रक्रिया धीमी
- कानून को टर्नओवर आधारित बनाने की मांग
आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और FSSAI से इस मामले में जवाब दाखिल करने को कहा है। अब इस केस की अगली सुनवाई में सरकार का पक्ष महत्वपूर्ण होगा।
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